तीसरा भाव
तीसरा भाव — नज़दीकी दायरे और आदान-प्रदान का भाव: भाई-बहन, पड़ोसी, छोटी यात्राएँ, रोज़मर्रा की बातचीत और पढ़ाई।
यह भाव किन बातों का कारक है
तीसरा भाव इस बात का कारक है कि व्यक्ति रोज़ कैसे संवाद करता है: चिट्ठी-पत्री, बातचीत, दस्तावेज़, काम पर आना-जाना, प्रारंभिक शिक्षा।
शास्त्रीय ज्योतिष में भाई-बहन और आम तौर पर बराबरी के रिश्तेदारी संबंध भी इसी भाव में आते हैं।
भाव में ग्रह
तीसरे भाव में बुध बुध से जुड़ी हर चीज़ को बढ़ा देता है: ढेर सारे संपर्क, ढेर सारी जानकारी, बोलने में सहजता।
यहाँ मंगल बातचीत में तीखापन और रिश्तेदारों से बहस देता है, शनि — कम बोलना और शुरुआती पढ़ाई में कठिनाइयाँ, चंद्रमा — संवाद में भावनात्मक जुड़ाव।
भाव-आरंभ (कस्प) पर राशि और खाली भाव
कस्प पर पड़ी राशि बोलने का ढंग बताती है: कन्या — सटीक, सिंह — चमकदार, वृश्चिक — गोलमोल और परखने वाला।
खाली तीसरे भाव को उसके स्वामी के ज़रिए पढ़ा जाता है। यह अक्सर खाली होता है — और इसका मतलब यह नहीं कि व्यक्ति चुप्पा है।