तुला राशिफल 2027
तुला (23 सितंबर — 22 अक्टूबर) के लिए 2027 का राशिफल: बृहस्पति और शनि के अनुसार वर्ष के मुख्य विषय, ग्रहण और वक्री ग्रह, प्रेम, काम और धन के लिए सबसे अच्छे महीने और हर महीने का विस्तृत विश्लेषण।
साल संक्षेप में
26 जुलाई तक। बृहस्पति ग्यारहवें भाव में: मित्रों और संरक्षकों, सफल समुदायों और पूरी होती योजनाओं का वर्ष।
26 जुलाई से। बृहस्पति बारहवें भाव में: नए चक्र से पहले का शांत वर्ष — परंपरा के अनुसार विश्राम, आत्मचिंतन और दूसरों की मदद का समय।
बृहस्पति इस समय वक्री है — ऐसा साल में लगभग चार महीने होता है। परंपरा के अनुसार विकास भीतर की ओर होता है: योजनाओं पर पुनर्विचार का समय, विस्तार का नहीं।
शनि सातवें भाव में: रिश्तों और अनुबंधों की मज़बूती की परीक्षा — परंपरा के अनुसार वे या तो और पक्के होते हैं, या ख़त्म हो जाते हैं।
शनि इस समय वक्री है — साल में लगभग साढ़े चार महीने। परंपरा के अनुसार — अधूरी ज़िम्मेदारियों पर लौटने का समय।
परंपरा के अनुसार अवधि का स्वर हल्का है: सामंजस्यपूर्ण पहलू (94) तनावपूर्ण पहलुओं (75) से साफ़ तौर पर ज़्यादा हैं। काम आगे बढ़ाने और जो चाहिए वह माँगने का अच्छा समय।
ग्रहों की स्थितियाँ, पहलू और ग्रहण — JPL DE421 एफ़ेमेरिस के अनुसार। भाव राशि से गिने जाते हैं: राशि स्वयं पहला भाव है, अगली दूसरा, और इसी तरह आगे। अच्छे और कठिन दिन परंपरा के नियमों से चुने गए हैं: चंद्रमा का भाव, ग्रहों की स्थितियाँ, दिन के पहलू, अमावस्या, पूर्णिमा और ग्रहण।
साल की घटनाएँ
ग्रहण
6 फ़रवरी — अमावस्या — कुंभ में, पाँचवाँ भाव। वलयाकार सूर्य ग्रहण। पाँचवें भाव में अमावस्या परंपरा के अनुसार प्रेम के लिए सबसे अच्छी अमावस्याओं में से एक है: नई जान-पहचान, पहली मुलाक़ातें, नया शौक़, रचनात्मक परियोजना, संतान से जुड़ी योजनाएँ। परंपरा के अनुसार ग्रहण सामान्य अमावस्या या पूर्णिमा से ज़्यादा और कई महीनों तक असर करता है: इस क्षेत्र की घटनाएँ अचानक आती हैं, और सलाह दी जाती है कि अहम शुरुआतें उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले-बाद न रखें।
21 फ़रवरी — पूर्णिमा — कन्या में, बारहवाँ भाव। उपच्छाया चंद्र ग्रहण। बारहवें भाव में पूर्णिमा परंपरा के अनुसार महीने के सबसे थकाने वाले दिनों में से एक है: छिपी बातें सामने आती हैं और शांति की चाह होती है। पूरा करने, आराम करने और कुछ अहम शुरू न करने का समय। परंपरा के अनुसार ग्रहण सामान्य अमावस्या या पूर्णिमा से ज़्यादा और कई महीनों तक असर करता है: इस क्षेत्र की घटनाएँ अचानक आती हैं, और सलाह दी जाती है कि अहम शुरुआतें उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले-बाद न रखें।
18 जुलाई — पूर्णिमा — मकर में, चौथा भाव। उपच्छाया चंद्र ग्रहण। चौथे भाव में पूर्णिमा पारिवारिक मामलों का शिखर है: घर और करियर अलग-अलग दिशाओं में खींचते हैं। परंपरा के अनुसार घर के काम पूरे करने और परिवार के साथ रहने का समय। परंपरा के अनुसार ग्रहण सामान्य अमावस्या या पूर्णिमा से ज़्यादा और कई महीनों तक असर करता है: इस क्षेत्र की घटनाएँ अचानक आती हैं, और सलाह दी जाती है कि अहम शुरुआतें उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले-बाद न रखें।
2 अगस्त — अमावस्या — सिंह में, ग्यारहवाँ भाव। पूर्ण सूर्य ग्रहण। ग्यारहवें भाव में अमावस्या नए दोस्तों और योजनाओं का समय है। परंपरा के अनुसार समुदायों से जुड़ने, समान सोच वाले लोगों को खोजने और आने वाले साल के लक्ष्य तय करने के लिए अनुकूल। परंपरा के अनुसार ग्रहण सामान्य अमावस्या या पूर्णिमा से ज़्यादा और कई महीनों तक असर करता है: इस क्षेत्र की घटनाएँ अचानक आती हैं, और सलाह दी जाती है कि अहम शुरुआतें उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले-बाद न रखें।
17 अगस्त — पूर्णिमा — कुंभ में, पाँचवाँ भाव। उपच्छाया चंद्र ग्रहण। पाँचवें भाव में पूर्णिमा प्रेम और रचनात्मकता का चरम है: भावनाएँ ज़्यादा तीव्र, इज़हार और रोमांटिक मोड़। परंपरा के अनुसार जुए में पैसा दाँव पर न लगाएँ। परंपरा के अनुसार ग्रहण सामान्य अमावस्या या पूर्णिमा से ज़्यादा और कई महीनों तक असर करता है: इस क्षेत्र की घटनाएँ अचानक आती हैं, और सलाह दी जाती है कि अहम शुरुआतें उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले-बाद न रखें।
वक्री अवधियाँ
- बुध: 9 फ़रवरी – 3 मार्च, मीन में, छठा भाव → कुंभ में, पाँचवाँ भाव
- बुध: 10 जून – 5 जुलाई, कर्क में, दसवाँ भाव → मिथुन में, नौवाँ भाव
- बुध: 7 अक्टूबर – 28 अक्टूबर, वृश्चिक में, दूसरा भाव → तुला में, पहला भाव
- मंगल: 10 जनवरी – 1 अप्रैल, कन्या में, बारहवाँ भाव → सिंह में, ग्यारहवाँ भाव
- बृहस्पति: साल की शुरुआत – 13 अप्रैल, सिंह में, ग्यारहवाँ भाव
- शनि: 9 अगस्त – 24 दिसंबर, मेष में, सातवाँ भाव
परंपरा के अनुसार वक्री ग्रह अपने विषयों में कमज़ोर होता है: बुध — अनुबंध, तकनीक, यात्राएँ; शुक्र — प्रेम और बड़ी ख़रीदारी; मंगल — नई शुरुआतें और विवाद; बृहस्पति और शनि — दीर्घकालिक योजनाएँ। इन क्षेत्रों में नया काम इन अवधियों के बाहर शुरू करना बेहतर है।
बृहस्पति और शनि राशि बदलते हैं
26 जुलाई — बृहस्पति राशि बदलता है: अब कन्या में, बारहवाँ भाव। बृहस्पति बारहवें भाव में: नए चक्र से पहले का शांत वर्ष — परंपरा के अनुसार विश्राम, आत्मचिंतन और दूसरों की मदद का समय।
प्रेम और रिश्ते
शुक्र, 1 मार्च – 26 मार्च: कुंभ में, पाँचवाँ भाव। पाँचवें भाव में शुक्र परंपरा के अनुसार रोमांस की सबसे अच्छी स्थिति है: मुलाक़ातें, प्यार में पड़ना, आनंद, उपहार। अगर आप अकेले हैं, तो यह किसी से मिलने का समय है।
शुक्र, 20 अप्रैल – 15 मई: मेष में, सातवाँ भाव। सातवें भाव में शुक्र परंपरा के अनुसार मिलन का समय है: जोड़े में सामंजस्य, सुलह, सगाई या विवाह के लिए अच्छा समय। अकेले लोग दूसरों के ज़रिए किसी से मिलते हैं।
शुक्र, 14 सितंबर – 8 अक्टूबर: तुला में, पहला भाव। आपकी राशि में शुक्र परंपरा के अनुसार प्रेम के लिए साल का सबसे अच्छा समय है: आप आकर्षक हैं और ध्यान अपने आप मिलता है। जान-पहचान बढ़ाने और अलमारी व छवि को नया रूप देने के लिए अच्छा।
शुक्र, 20 दिसंबर – साल का अंत: कुंभ में, पाँचवाँ भाव। पाँचवें भाव में शुक्र परंपरा के अनुसार रोमांस की सबसे अच्छी स्थिति है: मुलाक़ातें, प्यार में पड़ना, आनंद, उपहार। अगर आप अकेले हैं, तो यह किसी से मिलने का समय है।
मंगल, 15 जुलाई – 2 सितंबर: तुला में, पहला भाव। आपकी राशि में मंगल: जुनून और जोश — पहला कदम आप उठाते हैं। परंपरा के अनुसार प्रेम में भी और झगड़े में भी जल्दी भड़कना आसान है: अपने लहजे पर ध्यान दें।
कुल अंकों के अनुसार सबसे अच्छे महीने: मार्च, अप्रैल, मई।
काम और करियर
सातवें भाव में शनि: साझेदारी और अनुबंधों की मज़बूती की परीक्षा होती है। परंपरा के अनुसार भरोसेमंद लोगों के साथ काम करें और सब कुछ लिखित में रखें।
मंगल, 15 जुलाई – 2 सितंबर: तुला में, पहला भाव। आपकी राशि में मंगल: भरपूर ऊर्जा और पहल — परंपरा के अनुसार कठिन काम हाथ में लेने और अपनी बात आगे बढ़ाने का समय। दूसरा पहलू — अधीरता और धीमे लोगों से टकराव।
इस साल बुध की वक्री अवधियाँ: 3 (तारीख़ें ऊपर «वक्री अवधियाँ» में हैं)। इन हफ़्तों में परंपरा के अनुसार अनुबंध, तकनीक और यात्राएँ दोहरी जाँच माँगती हैं।
कुल अंकों के अनुसार सबसे अच्छे महीने: अप्रैल, जून, जुलाई।
धन
26 जुलाई तक। ग्यारहवें भाव में बृहस्पति परंपरा के अनुसार लाभ के भाव में है: परियोजनाओं से आय, बोनस, संरक्षकों और दोस्तों की मदद; वित्तीय योजनाएँ पूरी होती हैं।
26 जुलाई से। बारहवें भाव में बृहस्पति: पैसा चुपचाप निकल जाता है — दूसरों की मदद, इलाज, आराम पर। परंपरा के अनुसार दान और पुराने क़र्ज़ चुकाने के लिए अच्छा, जोखिम के लिए नहीं।
शुक्र, साल की शुरुआत – 7 जनवरी: वृश्चिक में, दूसरा भाव। दूसरे भाव में शुक्र परंपरा के अनुसार धन के लिए उसकी सबसे अच्छी स्थितियों में से एक है: आय आसानी से आती है, सुंदर और गुणवत्तापूर्ण चीज़ों की ख़रीद सफल रहती है।
शुक्र, 15 मई – 8 जून: वृषभ में, आठवाँ भाव। आठवें भाव में शुक्र: उपहार, साथी का पैसा, सफल क़र्ज़। परंपरा के अनुसार साझा वित्त पर बातचीत का अच्छा समय।
शुक्र, 27 जुलाई – 21 अगस्त: सिंह में, ग्यारहवाँ भाव। ग्यारहवें भाव में शुक्र: दोस्तों और संपर्कों के ज़रिए पैसा, उपहार, छोटी वित्तीय इच्छाओं का पूरा होना।
शुक्र, 8 अक्टूबर – 1 नवंबर: वृश्चिक में, दूसरा भाव। दूसरे भाव में शुक्र परंपरा के अनुसार धन के लिए उसकी सबसे अच्छी स्थितियों में से एक है: आय आसानी से आती है, सुंदर और गुणवत्तापूर्ण चीज़ों की ख़रीद सफल रहती है।
कुल अंकों के अनुसार सबसे अच्छे महीने: अप्रैल, मई, अगस्त।
सेहत और ऊर्जा
मंगल, साल की शुरुआत – 21 फ़रवरी: कन्या में, बारहवाँ भाव। बारहवें भाव में मंगल परंपरा के अनुसार छिपी थकान है: ऊर्जा चुपचाप निकल जाती है, अनिद्रा और बिना साफ़ कारण की अस्वस्थता संभव। ज़्यादा नींद, कम बोझ।
मंगल, 14 मई – 15 जुलाई: कन्या में, बारहवाँ भाव। बारहवें भाव में मंगल परंपरा के अनुसार छिपी थकान है: ऊर्जा चुपचाप निकल जाती है, अनिद्रा और बिना साफ़ कारण की अस्वस्थता संभव। ज़्यादा नींद, कम बोझ।
मंगल, 15 जुलाई – 2 सितंबर: तुला में, पहला भाव। आपकी राशि में मंगल: भरपूर ऊर्जा, पर परंपरा के अनुसार जल्दबाज़ी से चोट, कटने, जलने, सिरदर्द और बुख़ार का जोखिम ज़्यादा। खेल सबसे अच्छा निकास है।
सातवें भाव में शनि: परंपरा के अनुसार कमर के निचले हिस्से और गुर्दों का ध्यान रखें; रिश्तों का तनाव सेहत पर असर डालता है।
मंगल इस समय वक्री है। परंपरा के अनुसार काम अटकते हैं और पुराने टकराव लौट आते हैं — ऊर्जा उन कामों में लगाना बेहतर है, जो पहले से शुरू हो चुके हैं।
ये सेहत के बारे में ज्योतिषीय सुझाव हैं, चिकित्सा सलाह नहीं: तबीयत ठीक न लगे तो डॉक्टर से मिलें।
कुल अंकों के अनुसार सबसे अच्छे महीने: अप्रैल, सितंबर, अक्टूबर।
यूरेनस, नेपच्यून और प्लूटो
नौवें भाव में यूरेनस: अचानक यात्राएँ, विचारों में बदलाव, अनोखी पढ़ाई। परंपरा के अनुसार विश्वदृष्टि उलट-पुलट हो जाती है।
सातवें भाव में नेपच्यून: साथी को आदर्श मानना, रिश्ते में आत्म-बलिदान। परंपरा के अनुसार व्यक्ति को जैसा है वैसा देखना और कारोबारी साझेदारों को परखना ज़रूरी है।
पाँचवें भाव में प्लूटो: जुनूनी, सब कुछ समेट लेने वाला प्रेम, प्रबल रचनात्मकता। परंपरा के अनुसार भावनाओं को नियंत्रण में न बदलना ज़रूरी है।
महीना-दर-महीना
जनवरी संतुलित महीना
सूर्य — आपका चौथा भाव: घर और परिवार। 7 जनवरी को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका तीसरा भाव। 8 जनवरी को अमावस्या — चौथा भाव (घर और परिवार)। 10 जनवरी को मंगल वक्री होता है। 13 जनवरी को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका पाँचवाँ भाव। 20 जनवरी को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका पाँचवाँ भाव। 22 जनवरी को पूर्णिमा — ग्यारहवाँ भाव (मित्र और योजनाएँ)।
महीने के अच्छे दिन: 1, 14, 22।
फ़रवरी तनावपूर्ण महीना
सूर्य — आपका पाँचवाँ भाव: प्रेम, संतान, रचनात्मकता। 1 फ़रवरी को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका छठा भाव। 3 फ़रवरी को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका चौथा भाव। 6 फ़रवरी को वलयाकार सूर्य ग्रहण — पाँचवाँ भाव (प्रेम, संतान, रचनात्मकता)। 8 फ़रवरी को यूरेनस मार्गी होता है। 9 फ़रवरी को बुध वक्री होता है। 18 फ़रवरी को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका पाँचवाँ भाव। 19 फ़रवरी को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका छठा भाव। 21 फ़रवरी को उपच्छाया चंद्र ग्रहण — बारहवाँ भाव (विश्राम और एकांत)। 21 फ़रवरी को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका ग्यारहवाँ भाव।
महीने के अच्छे दिन: 8, 23, 24।
मार्च अच्छा महीना
सूर्य — आपका छठा भाव: काम और स्वास्थ्य। 1 मार्च को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका पाँचवाँ भाव। 3 मार्च को बुध मार्गी होता है। 8 मार्च को अमावस्या — छठा भाव (काम और स्वास्थ्य)। 18 मार्च को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका छठा भाव। 21 मार्च को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका सातवाँ भाव। 22 मार्च को पूर्णिमा — पहला भाव (व्यक्तित्व और सेहत)। 26 मार्च को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका छठा भाव।
महीने के अच्छे दिन: 6, 23, 27।
अप्रैल अच्छा महीना
सूर्य — आपका सातवाँ भाव: साझेदार और अनुबंध। 1 अप्रैल को मंगल मार्गी होता है। 7 अप्रैल को अमावस्या — सातवाँ भाव (साझेदार और अनुबंध)। 9 अप्रैल को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका सातवाँ भाव। 13 अप्रैल को बृहस्पति मार्गी होता है। 20 अप्रैल को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका सातवाँ भाव। 20 अप्रैल को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका आठवाँ भाव। 21 अप्रैल को पूर्णिमा — दूसरा भाव (धन और संपत्ति)। 25 अप्रैल को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका आठवाँ भाव।
महीने के अच्छे दिन: 3, 11, 26।
मई अच्छा महीना
सूर्य — आपका आठवाँ भाव: साझा धन और बदलाव। 6 मई को अमावस्या — आठवाँ भाव (साझा धन और बदलाव)। 8 मई को प्लूटो वक्री होता है। 9 मई को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका नौवाँ भाव। 14 मई को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका बारहवाँ भाव। 15 मई को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका आठवाँ भाव। 20 मई को पूर्णिमा — दूसरा भाव (धन और संपत्ति)। 21 मई को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका नौवाँ भाव। 28 मई को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका दसवाँ भाव।
महीने के अच्छे दिन: 4, 5, 12।
जून संतुलित महीना
सूर्य — आपका नौवाँ भाव: लंबी यात्राएँ और पढ़ाई। 5 जून को अमावस्या — नौवाँ भाव (लंबी यात्राएँ और पढ़ाई)। 8 जून को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका नौवाँ भाव। 10 जून को बुध वक्री होता है। 19 जून को पूर्णिमा — तीसरा भाव (संवाद और यात्राएँ)। 21 जून को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका दसवाँ भाव। 26 जून को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका नौवाँ भाव।
महीने के अच्छे दिन: 8, 13, 14।
जुलाई संतुलित महीना
सूर्य — आपका दसवाँ भाव: करियर और प्रतिष्ठा। 3 जुलाई को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका दसवाँ भाव। 4 जुलाई को अमावस्या — दसवाँ भाव (करियर और प्रतिष्ठा)। 5 जुलाई को बुध मार्गी होता है। 10 जुलाई को नेपच्यून वक्री होता है। 12 जुलाई को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका दसवाँ भाव। 15 जुलाई को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका पहला भाव। 18 जुलाई को उपच्छाया चंद्र ग्रहण — चौथा भाव (घर और परिवार)। 23 जुलाई को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका ग्यारहवाँ भाव। 26 जुलाई को बृहस्पति आगे बढ़ता है: अब आपका बारहवाँ भाव। 27 जुलाई को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका ग्यारहवाँ भाव।
महीने के अच्छे दिन: 6, 12, 30।
अगस्त संतुलित महीना
सूर्य — आपका ग्यारहवाँ भाव: मित्र और योजनाएँ। 2 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण — ग्यारहवाँ भाव (मित्र और योजनाएँ)। 2 अगस्त को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका ग्यारहवाँ भाव। 9 अगस्त को शनि वक्री होता है। 17 अगस्त को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका बारहवाँ भाव। 17 अगस्त को उपच्छाया चंद्र ग्रहण — पाँचवाँ भाव (प्रेम, संतान, रचनात्मकता)। 21 अगस्त को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका बारहवाँ भाव। 23 अगस्त को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका बारहवाँ भाव। 31 अगस्त को अमावस्या — बारहवाँ भाव (विश्राम और एकांत)।
महीने के अच्छे दिन: 7, 8, 16।
सितंबर तनावपूर्ण महीना
सूर्य — आपका बारहवाँ भाव: विश्राम और एकांत। 2 सितंबर को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका दूसरा भाव। 3 सितंबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका पहला भाव। 14 सितंबर को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका पहला भाव। 15 सितंबर को यूरेनस वक्री होता है। 16 सितंबर को पूर्णिमा — छठा भाव (काम और स्वास्थ्य)। 23 सितंबर को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका पहला भाव। 27 सितंबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका दूसरा भाव। 30 सितंबर को अमावस्या — पहला भाव (व्यक्तित्व और सेहत)।
महीने के अच्छे दिन: 22, 26, 27।
अक्टूबर संतुलित महीना
सूर्य — आपका पहला भाव: व्यक्तित्व और सेहत। 7 अक्टूबर को बुध वक्री होता है। 8 अक्टूबर को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका दूसरा भाव। 15 अक्टूबर को पूर्णिमा — सातवाँ भाव (साझेदार और अनुबंध)। 16 अक्टूबर को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका तीसरा भाव। 16 अक्टूबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका पहला भाव। 18 अक्टूबर को प्लूटो मार्गी होता है। 23 अक्टूबर को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका दूसरा भाव। 28 अक्टूबर को बुध मार्गी होता है। 29 अक्टूबर को अमावस्या — दूसरा भाव (धन और संपत्ति)।
महीने के अच्छे दिन: 11, 22, 23।
नवंबर संतुलित महीना
सूर्य — आपका दूसरा भाव: धन और संपत्ति। 1 नवंबर को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका तीसरा भाव। 10 नवंबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका दूसरा भाव। 14 नवंबर को पूर्णिमा — आठवाँ भाव (साझा धन और बदलाव)। 22 नवंबर को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका तीसरा भाव। 25 नवंबर को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका चौथा भाव। 26 नवंबर को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका चौथा भाव। 28 नवंबर को अमावस्या — तीसरा भाव (संवाद और यात्राएँ)। 29 नवंबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका तीसरा भाव।
महीने के अच्छे दिन: 5, 15, 19।
दिसंबर तनावपूर्ण महीना
सूर्य — आपका तीसरा भाव: संवाद और यात्राएँ। 13 दिसंबर को पूर्णिमा — नौवाँ भाव (लंबी यात्राएँ और पढ़ाई)। 15 दिसंबर को नेपच्यून मार्गी होता है। 18 दिसंबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका चौथा भाव। 20 दिसंबर को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका पाँचवाँ भाव। 22 दिसंबर को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका चौथा भाव। 24 दिसंबर को शनि मार्गी होता है। 28 दिसंबर को अमावस्या — चौथा भाव (घर और परिवार)।
महीने के अच्छे दिन: 2, 13, 17।
यह राशिफल कैसे बनाया गया है
2027 का राशिफल धीमे ग्रहों पर आधारित है: तुला के लिए बृहस्पति और शनि कहाँ स्थित हैं, यूरेनस, नेपच्यून और प्लूटो किन भावों से गुज़रते हैं, ग्रहण किन भावों में पड़ते हैं और ग्रह कब वक्री होते हैं। यही वर्ष के मुख्य विषय हैं — इन्हें न दिन बदलते हैं, न सप्ताह।
महीनेवार विश्लेषण और प्रेम, काम, धन और ऊर्जा के लिए सबसे अच्छे महीने — महीने के सभी दिनों के अंकों का योग: चंद्रमा का भाव, शुक्र, मंगल, बृहस्पति और शनि की स्थितियाँ, वक्री अवधियाँ, पहलू, अमावस्या-पूर्णिमा और ग्रहण। सभी तिथियाँ JPL DE421 एफ़ेमेरिस के अनुसार हैं, भाव — सौर: तुला — पहला भाव।
तुला का स्वामी ग्रह
राशि का स्वामी ग्रह — शुक्र। परंपरा के अनुसार तुला के लिए इसकी स्थिति और पहलू अन्य राशियों की तुलना में अधिक मायने रखते हैं: स्वामी ग्रह के शुभ पहलू पूरी अवधि को मज़बूत करते हैं, तनावपूर्ण पहलू उसे कठिन बनाते हैं।
तुला राशिफल — अन्य अवधियों के लिए
यह पाठ सभी तुला राशि वालों के लिए एक जैसा है — राशि के अनुसार राशिफल ऐसे ही बनता है, और इसकी भविष्यवाणी की शक्ति सिद्ध नहीं है। व्यक्तिगत तस्वीर जन्म कुंडली पर गोचर और वर्षफल में दिखती है, और राशि का स्वभाव — तुला पेज पर।