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वर्ष 2027

मीन राशिफल 2027

मीन (19 फ़रवरी — 20 मार्च) के लिए 2027 का राशिफल: बृहस्पति और शनि के अनुसार वर्ष के मुख्य विषय, ग्रहण और वक्री ग्रह, प्रेम, काम और धन के लिए सबसे अच्छे महीने और हर महीने का विस्तृत विश्लेषण।

मीन · राशिफल 2027
6 → 7बृहस्पति का भाव
2शनि का भाव
अप्रैल, अग॰, दिस॰सबसे अच्छे महीने

साल संक्षेप में

बृहस्पति — सिंह में, छठा भाव; 26 जुलाई से — कन्या में, सातवाँ भाव वक्री

26 जुलाई तक। बृहस्पति छठे भाव में: भारी काम-काज और उपयोगी मेहनत का वर्ष; परंपरा सेहत की अनदेखी न करने की सलाह देती है।

26 जुलाई से। बृहस्पति सातवें भाव में: गठबंधनों का वर्ष — परंपरा के अनुसार विवाह, साझेदारी और लाभदायक अनुबंधों के लिए अनुकूल।

बृहस्पति इस समय वक्री है — ऐसा साल में लगभग चार महीने होता है। परंपरा के अनुसार विकास भीतर की ओर होता है: योजनाओं पर पुनर्विचार का समय, विस्तार का नहीं।

शनि — मेष में, दूसरा भाव वक्री

शनि दूसरे भाव में: परंपरा के अनुसार बचत और वित्तीय अनुशासन का दौर — पैसा मेहनत से मिलता है।

शनि इस समय वक्री है — साल में लगभग साढ़े चार महीने। परंपरा के अनुसार — अधूरी ज़िम्मेदारियों पर लौटने का समय।

परंपरा के अनुसार अवधि का स्वर हल्का है: सामंजस्यपूर्ण पहलू (94) तनावपूर्ण पहलुओं (75) से साफ़ तौर पर ज़्यादा हैं। काम आगे बढ़ाने और जो चाहिए वह माँगने का अच्छा समय।

ग्रहों की स्थितियाँ, पहलू और ग्रहण — JPL DE421 एफ़ेमेरिस के अनुसार। भाव राशि से गिने जाते हैं: राशि स्वयं पहला भाव है, अगली दूसरा, और इसी तरह आगे। अच्छे और कठिन दिन परंपरा के नियमों से चुने गए हैं: चंद्रमा का भाव, ग्रहों की स्थितियाँ, दिन के पहलू, अमावस्या, पूर्णिमा और ग्रहण।

साल की घटनाएँ

ग्रहण

6 फ़रवरी — अमावस्या — कुंभ में, बारहवाँ भाव। वलयाकार सूर्य ग्रहण। बारहवें भाव में अमावस्या एक शांत शुरुआत है। परंपरा के अनुसार यह धूमधाम से शुरुआत का नहीं, बल्कि आराम, पुराने काम निपटाने, एकांत और भीतरी काम का समय है। परंपरा के अनुसार ग्रहण सामान्य अमावस्या या पूर्णिमा से ज़्यादा और कई महीनों तक असर करता है: इस क्षेत्र की घटनाएँ अचानक आती हैं, और सलाह दी जाती है कि अहम शुरुआतें उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले-बाद न रखें।

21 फ़रवरी — पूर्णिमा — कन्या में, सातवाँ भाव। उपच्छाया चंद्र ग्रहण। सातवें भाव में पूर्णिमा परंपरा के अनुसार रिश्तों और साझेदारी में सच का क्षण है: कुछ तय होता है — या ख़त्म होता है। अल्टीमेटम का समय नहीं। परंपरा के अनुसार ग्रहण सामान्य अमावस्या या पूर्णिमा से ज़्यादा और कई महीनों तक असर करता है: इस क्षेत्र की घटनाएँ अचानक आती हैं, और सलाह दी जाती है कि अहम शुरुआतें उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले-बाद न रखें।

18 जुलाई — पूर्णिमा — मकर में, ग्यारहवाँ भाव। उपच्छाया चंद्र ग्रहण। ग्यारहवें भाव में पूर्णिमा दोस्ती और साझा योजनाओं का शिखर है: परंपरा के अनुसार दिखता है कि कौन-से लक्ष्य पूरे हो रहे हैं, किन्हें छोड़ना है और कौन-से दोस्त सच में साथ हैं। परंपरा के अनुसार ग्रहण सामान्य अमावस्या या पूर्णिमा से ज़्यादा और कई महीनों तक असर करता है: इस क्षेत्र की घटनाएँ अचानक आती हैं, और सलाह दी जाती है कि अहम शुरुआतें उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले-बाद न रखें।

2 अगस्त — अमावस्या — सिंह में, छठा भाव। पूर्ण सूर्य ग्रहण। छठे भाव में अमावस्या काम और सेहत में नया चक्र शुरू करती है। परंपरा के अनुसार ज़िम्मेदारियों को व्यवस्थित करने, दिनचर्या बदलने, इलाज या व्यायाम कार्यक्रम शुरू करने या नौकरी खोजने का समय। परंपरा के अनुसार ग्रहण सामान्य अमावस्या या पूर्णिमा से ज़्यादा और कई महीनों तक असर करता है: इस क्षेत्र की घटनाएँ अचानक आती हैं, और सलाह दी जाती है कि अहम शुरुआतें उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले-बाद न रखें।

17 अगस्त — पूर्णिमा — कुंभ में, बारहवाँ भाव। उपच्छाया चंद्र ग्रहण। बारहवें भाव में पूर्णिमा परंपरा के अनुसार महीने के सबसे थकाने वाले दिनों में से एक है: छिपी बातें सामने आती हैं और शांति की चाह होती है। पूरा करने, आराम करने और कुछ अहम शुरू न करने का समय। परंपरा के अनुसार ग्रहण सामान्य अमावस्या या पूर्णिमा से ज़्यादा और कई महीनों तक असर करता है: इस क्षेत्र की घटनाएँ अचानक आती हैं, और सलाह दी जाती है कि अहम शुरुआतें उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले-बाद न रखें।

वक्री अवधियाँ

  • बुध: 9 फ़रवरी – 3 मार्च, मीन में, पहला भाव → कुंभ में, बारहवाँ भाव
  • बुध: 10 जून – 5 जुलाई, कर्क में, पाँचवाँ भाव → मिथुन में, चौथा भाव
  • बुध: 7 अक्टूबर – 28 अक्टूबर, वृश्चिक में, नौवाँ भाव → तुला में, आठवाँ भाव
  • मंगल: 10 जनवरी – 1 अप्रैल, कन्या में, सातवाँ भाव → सिंह में, छठा भाव
  • बृहस्पति: साल की शुरुआत – 13 अप्रैल, सिंह में, छठा भाव
  • शनि: 9 अगस्त – 24 दिसंबर, मेष में, दूसरा भाव

परंपरा के अनुसार वक्री ग्रह अपने विषयों में कमज़ोर होता है: बुध — अनुबंध, तकनीक, यात्राएँ; शुक्र — प्रेम और बड़ी ख़रीदारी; मंगल — नई शुरुआतें और विवाद; बृहस्पति और शनि — दीर्घकालिक योजनाएँ। इन क्षेत्रों में नया काम इन अवधियों के बाहर शुरू करना बेहतर है।

बृहस्पति और शनि राशि बदलते हैं

26 जुलाई — बृहस्पति राशि बदलता है: अब कन्या में, सातवाँ भाव। बृहस्पति सातवें भाव में: गठबंधनों का वर्ष — परंपरा के अनुसार विवाह, साझेदारी और लाभदायक अनुबंधों के लिए अनुकूल।

प्रेम और रिश्ते

शुक्र, 26 मार्च – 20 अप्रैल: मीन में, पहला भाव। आपकी राशि में शुक्र परंपरा के अनुसार प्रेम के लिए साल का सबसे अच्छा समय है: आप आकर्षक हैं और ध्यान अपने आप मिलता है। जान-पहचान बढ़ाने और अलमारी व छवि को नया रूप देने के लिए अच्छा।

शुक्र, 3 जुलाई – 27 जुलाई: कर्क में, पाँचवाँ भाव। पाँचवें भाव में शुक्र परंपरा के अनुसार रोमांस की सबसे अच्छी स्थिति है: मुलाक़ातें, प्यार में पड़ना, आनंद, उपहार। अगर आप अकेले हैं, तो यह किसी से मिलने का समय है।

शुक्र, 21 अगस्त – 14 सितंबर: कन्या में, सातवाँ भाव। सातवें भाव में शुक्र परंपरा के अनुसार मिलन का समय है: जोड़े में सामंजस्य, सुलह, सगाई या विवाह के लिए अच्छा समय। अकेले लोग दूसरों के ज़रिए किसी से मिलते हैं।

मंगल, साल की शुरुआत – 21 फ़रवरी: कन्या में, सातवाँ भाव। सातवें भाव में मंगल परंपरा के अनुसार जोड़े में खुले टकराव का समय है: जो जमा हुआ है वह बाहर आता है। बहस ठीक है, जंग नहीं; जुनून भी प्रबल है।

मंगल, 14 मई – 15 जुलाई: कन्या में, सातवाँ भाव। सातवें भाव में मंगल परंपरा के अनुसार जोड़े में खुले टकराव का समय है: जो जमा हुआ है वह बाहर आता है। बहस ठीक है, जंग नहीं; जुनून भी प्रबल है।

मंगल, 15 जुलाई – 2 सितंबर: तुला में, आठवाँ भाव। आठवें भाव में मंगल: तीव्र जुनून और नियंत्रण की खींचतान। परंपरा के अनुसार दबाव न डालना और ईर्ष्या न करना ज़रूरी है; अंतरंगता सामने आती है।

बृहस्पति, 26 जुलाई – साल का अंत: कन्या में, सातवाँ भाव। बृहस्पति सातवें भाव में: गठबंधनों का वर्ष — परंपरा के अनुसार विवाह, साझेदारी और लाभदायक अनुबंधों के लिए अनुकूल।

कुल अंकों के अनुसार सबसे अच्छे महीने: अगस्त, सितंबर, दिसंबर।

काम और करियर

शनि — मेष में, दूसरा भाव वक्री

दूसरे भाव में शनि: पैसे के लिए काम, आय में धीमी बढ़त। परंपरा के अनुसार अभी साहसिक फ़ैसलों से ज़्यादा वित्तीय अनुशासन मायने रखता है।

बृहस्पति, साल की शुरुआत – 26 जुलाई: सिंह में, छठा भाव। बृहस्पति छठे भाव में: भारी काम-काज और उपयोगी मेहनत का वर्ष; परंपरा सेहत की अनदेखी न करने की सलाह देती है।

मंगल, 21 फ़रवरी – 14 मई: सिंह में, छठा भाव। छठे भाव में मंगल परंपरा के अनुसार काम के लिए मज़बूत स्थिति है: बहुत काम और बहुत कुछ पूरा। पर सहकर्मियों से घर्षण और ज़रूरत से ज़्यादा काम अक्सर साथ चलते हैं।

मंगल, 16 अक्टूबर – 26 नवंबर: धनु में, दसवाँ भाव। दसवें भाव में मंगल परंपरा के अनुसार उसकी सबसे मज़बूत स्थितियों में से एक है: करियर में सफलता, महत्वाकांक्षा, नतीजे। वरिष्ठों से टकराव संभव — अपनी लड़ाइयाँ सोच-समझकर चुनें।

इस साल बुध की वक्री अवधियाँ: 3 (तारीख़ें ऊपर «वक्री अवधियाँ» में हैं)। इन हफ़्तों में परंपरा के अनुसार अनुबंध, तकनीक और यात्राएँ दोहरी जाँच माँगती हैं।

कुल अंकों के अनुसार सबसे अच्छे महीने: जनवरी, अप्रैल, अगस्त।

धन

बृहस्पति — सिंह में, छठा भाव; 26 जुलाई से — कन्या में, सातवाँ भाव वक्री

26 जुलाई तक। छठे भाव में बृहस्पति: काम और अतिरिक्त काम से कमाई बढ़ती है। परंपरा के अनुसार पैसा ईमानदार पर मेहनत का होता है; बेहतर वेतन वाली नौकरी में जाना सफल रहता है।

26 जुलाई से। सातवें भाव में बृहस्पति: लाभदायक अनुबंध और साझेदार। परंपरा के अनुसार पैसा गठबंधनों, अनुबंधों, जीवनसाथी या ग्राहकों के ज़रिए आता है।

शुक्र, 3 फ़रवरी – 1 मार्च: मकर में, ग्यारहवाँ भाव। ग्यारहवें भाव में शुक्र: दोस्तों और संपर्कों के ज़रिए पैसा, उपहार, छोटी वित्तीय इच्छाओं का पूरा होना।

शुक्र, 20 अप्रैल – 15 मई: मेष में, दूसरा भाव। दूसरे भाव में शुक्र परंपरा के अनुसार धन के लिए उसकी सबसे अच्छी स्थितियों में से एक है: आय आसानी से आती है, सुंदर और गुणवत्तापूर्ण चीज़ों की ख़रीद सफल रहती है।

शुक्र, 14 सितंबर – 8 अक्टूबर: तुला में, आठवाँ भाव। आठवें भाव में शुक्र: उपहार, साथी का पैसा, सफल क़र्ज़। परंपरा के अनुसार साझा वित्त पर बातचीत का अच्छा समय।

शुक्र, 25 नवंबर – 20 दिसंबर: मकर में, ग्यारहवाँ भाव। ग्यारहवें भाव में शुक्र: दोस्तों और संपर्कों के ज़रिए पैसा, उपहार, छोटी वित्तीय इच्छाओं का पूरा होना।

कुल अंकों के अनुसार सबसे अच्छे महीने: अप्रैल, सितंबर, दिसंबर।

सेहत और ऊर्जा

मंगल, 21 फ़रवरी – 14 मई: सिंह में, छठा भाव। छठे भाव में मंगल परंपरा के अनुसार सेहत के लिए मुख्य स्थिति है: ज़्यादा काम, सूजन और तीव्र बीमारी का जोखिम। दिनचर्या, नींद और संतुलित व्यायाम ज़रूरी हैं।

दूसरे भाव में शनि: परंपरा के अनुसार गले, गर्दन और थायरॉइड का ध्यान रखें; भोजन संयमित और नियमित रखें।

मंगल इस समय वक्री है। परंपरा के अनुसार काम अटकते हैं और पुराने टकराव लौट आते हैं — ऊर्जा उन कामों में लगाना बेहतर है, जो पहले से शुरू हो चुके हैं।

ये सेहत के बारे में ज्योतिषीय सुझाव हैं, चिकित्सा सलाह नहीं: तबीयत ठीक न लगे तो डॉक्टर से मिलें।

कुल अंकों के अनुसार सबसे अच्छे महीने: मार्च, अप्रैल, मई।

यूरेनस, नेपच्यून और प्लूटो

यूरेनस — मिथुन में, चौथा भाव वक्री

चौथे भाव में यूरेनस: घर बदलना और परिवार में बदलाव, घर में अस्थिरता। परंपरा के अनुसार पारिवारिक ढर्रों से मुक्त होने का समय।

नेपच्यून — मेष में, दूसरा भाव वक्री

दूसरे भाव में नेपच्यून: पैसा चुपचाप निकल जाता है, मूल्य बदलते हैं। परंपरा के अनुसार संदिग्ध निवेशों से सावधान रहें; रचनात्मकता और लोगों की मदद से आय अच्छी चलती है।

प्लूटो — कुंभ में, बारहवाँ भाव वक्री

बारहवें भाव में प्लूटो: गहरे डरों, रहस्यों, छिपे प्रभाव पर काम। परंपरा के अनुसार भीतरी शुद्धि का समय।

महीना-दर-महीना

जनवरी संतुलित महीना

सूर्य — आपका ग्यारहवाँ भाव: मित्र और योजनाएँ। 7 जनवरी को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका दसवाँ भाव। 8 जनवरी को अमावस्या — ग्यारहवाँ भाव (मित्र और योजनाएँ)। 10 जनवरी को मंगल वक्री होता है। 13 जनवरी को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका बारहवाँ भाव। 20 जनवरी को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका बारहवाँ भाव। 22 जनवरी को पूर्णिमा — छठा भाव (काम और स्वास्थ्य)।

महीने के अच्छे दिन: 12, 14, 16।

फ़रवरी तनावपूर्ण महीना

सूर्य — आपका बारहवाँ भाव: विश्राम और एकांत। 1 फ़रवरी को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका पहला भाव। 3 फ़रवरी को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका ग्यारहवाँ भाव। 6 फ़रवरी को वलयाकार सूर्य ग्रहण — बारहवाँ भाव (विश्राम और एकांत)। 8 फ़रवरी को यूरेनस मार्गी होता है। 9 फ़रवरी को बुध वक्री होता है। 18 फ़रवरी को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका बारहवाँ भाव। 19 फ़रवरी को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका पहला भाव। 21 फ़रवरी को उपच्छाया चंद्र ग्रहण — सातवाँ भाव (साझेदार और अनुबंध)। 21 फ़रवरी को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका छठा भाव।

महीने के अच्छे दिन: 8, 22, 28।

मार्च संतुलित महीना

सूर्य — आपका पहला भाव: व्यक्तित्व और सेहत। 1 मार्च को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका बारहवाँ भाव। 3 मार्च को बुध मार्गी होता है। 8 मार्च को अमावस्या — पहला भाव (व्यक्तित्व और सेहत)। 18 मार्च को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका पहला भाव। 21 मार्च को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका दूसरा भाव। 22 मार्च को पूर्णिमा — आठवाँ भाव (साझा धन और बदलाव)। 26 मार्च को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका पहला भाव।

महीने के अच्छे दिन: 4, 13, 27।

अप्रैल अच्छा महीना

सूर्य — आपका दूसरा भाव: धन और संपत्ति। 1 अप्रैल को मंगल मार्गी होता है। 7 अप्रैल को अमावस्या — दूसरा भाव (धन और संपत्ति)। 9 अप्रैल को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका दूसरा भाव। 13 अप्रैल को बृहस्पति मार्गी होता है। 20 अप्रैल को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका दूसरा भाव। 20 अप्रैल को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका तीसरा भाव। 21 अप्रैल को पूर्णिमा — नौवाँ भाव (लंबी यात्राएँ और पढ़ाई)। 25 अप्रैल को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका तीसरा भाव।

महीने के अच्छे दिन: 11, 18, 21।

मई संतुलित महीना

सूर्य — आपका तीसरा भाव: संवाद और यात्राएँ। 6 मई को अमावस्या — तीसरा भाव (संवाद और यात्राएँ)। 8 मई को प्लूटो वक्री होता है। 9 मई को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका चौथा भाव। 14 मई को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका सातवाँ भाव। 15 मई को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका तीसरा भाव। 20 मई को पूर्णिमा — नौवाँ भाव (लंबी यात्राएँ और पढ़ाई)। 21 मई को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका चौथा भाव। 28 मई को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका पाँचवाँ भाव।

महीने के अच्छे दिन: 1, 4, 12।

जून तनावपूर्ण महीना

सूर्य — आपका चौथा भाव: घर और परिवार। 5 जून को अमावस्या — चौथा भाव (घर और परिवार)। 8 जून को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका चौथा भाव। 10 जून को बुध वक्री होता है। 19 जून को पूर्णिमा — दसवाँ भाव (करियर और प्रतिष्ठा)। 21 जून को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका पाँचवाँ भाव। 26 जून को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका चौथा भाव।

महीने के अच्छे दिन: 17, 29, 30।

जुलाई संतुलित महीना

सूर्य — आपका पाँचवाँ भाव: प्रेम, संतान, रचनात्मकता। 3 जुलाई को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका पाँचवाँ भाव। 4 जुलाई को अमावस्या — पाँचवाँ भाव (प्रेम, संतान, रचनात्मकता)। 5 जुलाई को बुध मार्गी होता है। 10 जुलाई को नेपच्यून वक्री होता है। 12 जुलाई को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका पाँचवाँ भाव। 15 जुलाई को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका आठवाँ भाव। 18 जुलाई को उपच्छाया चंद्र ग्रहण — ग्यारहवाँ भाव (मित्र और योजनाएँ)। 23 जुलाई को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका छठा भाव। 26 जुलाई को बृहस्पति आगे बढ़ता है: अब आपका सातवाँ भाव। 27 जुलाई को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका छठा भाव।

महीने के अच्छे दिन: 12, 23, 30।

अगस्त अच्छा महीना

सूर्य — आपका छठा भाव: काम और स्वास्थ्य। 2 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण — छठा भाव (काम और स्वास्थ्य)। 2 अगस्त को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका छठा भाव। 9 अगस्त को शनि वक्री होता है। 17 अगस्त को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका सातवाँ भाव। 17 अगस्त को उपच्छाया चंद्र ग्रहण — बारहवाँ भाव (विश्राम और एकांत)। 21 अगस्त को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका सातवाँ भाव। 23 अगस्त को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका सातवाँ भाव। 31 अगस्त को अमावस्या — सातवाँ भाव (साझेदार और अनुबंध)।

महीने के अच्छे दिन: 4, 11, 12।

सितंबर संतुलित महीना

सूर्य — आपका सातवाँ भाव: साझेदार और अनुबंध। 2 सितंबर को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका नौवाँ भाव। 3 सितंबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका आठवाँ भाव। 14 सितंबर को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका आठवाँ भाव। 15 सितंबर को यूरेनस वक्री होता है। 16 सितंबर को पूर्णिमा — पहला भाव (व्यक्तित्व और सेहत)। 23 सितंबर को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका आठवाँ भाव। 27 सितंबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका नौवाँ भाव। 30 सितंबर को अमावस्या — आठवाँ भाव (साझा धन और बदलाव)।

महीने के अच्छे दिन: 9, 20, 22।

अक्टूबर तनावपूर्ण महीना

सूर्य — आपका आठवाँ भाव: साझा धन और बदलाव। 7 अक्टूबर को बुध वक्री होता है। 8 अक्टूबर को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका नौवाँ भाव। 15 अक्टूबर को पूर्णिमा — दूसरा भाव (धन और संपत्ति)। 16 अक्टूबर को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका दसवाँ भाव। 16 अक्टूबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका आठवाँ भाव। 18 अक्टूबर को प्लूटो मार्गी होता है। 23 अक्टूबर को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका नौवाँ भाव। 28 अक्टूबर को बुध मार्गी होता है। 29 अक्टूबर को अमावस्या — नौवाँ भाव (लंबी यात्राएँ और पढ़ाई)।

महीने के अच्छे दिन: 3, 22, 23।

नवंबर संतुलित महीना

सूर्य — आपका नौवाँ भाव: लंबी यात्राएँ और पढ़ाई। 1 नवंबर को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका दसवाँ भाव। 10 नवंबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका नौवाँ भाव। 14 नवंबर को पूर्णिमा — तीसरा भाव (संवाद और यात्राएँ)। 22 नवंबर को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका दसवाँ भाव। 25 नवंबर को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका ग्यारहवाँ भाव। 26 नवंबर को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका ग्यारहवाँ भाव। 28 नवंबर को अमावस्या — दसवाँ भाव (करियर और प्रतिष्ठा)। 29 नवंबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका दसवाँ भाव।

महीने के अच्छे दिन: 15, 19, 26।

दिसंबर अच्छा महीना

सूर्य — आपका दसवाँ भाव: करियर और प्रतिष्ठा। 13 दिसंबर को पूर्णिमा — चौथा भाव (घर और परिवार)। 15 दिसंबर को नेपच्यून मार्गी होता है। 18 दिसंबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका ग्यारहवाँ भाव। 20 दिसंबर को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका बारहवाँ भाव। 22 दिसंबर को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका ग्यारहवाँ भाव। 24 दिसंबर को शनि मार्गी होता है। 28 दिसंबर को अमावस्या — ग्यारहवाँ भाव (मित्र और योजनाएँ)।

महीने के अच्छे दिन: 2, 13, 17।

यह राशिफल कैसे बनाया गया है

2027 का राशिफल धीमे ग्रहों पर आधारित है: मीन के लिए बृहस्पति और शनि कहाँ स्थित हैं, यूरेनस, नेपच्यून और प्लूटो किन भावों से गुज़रते हैं, ग्रहण किन भावों में पड़ते हैं और ग्रह कब वक्री होते हैं। यही वर्ष के मुख्य विषय हैं — इन्हें न दिन बदलते हैं, न सप्ताह।

महीनेवार विश्लेषण और प्रेम, काम, धन और ऊर्जा के लिए सबसे अच्छे महीने — महीने के सभी दिनों के अंकों का योग: चंद्रमा का भाव, शुक्र, मंगल, बृहस्पति और शनि की स्थितियाँ, वक्री अवधियाँ, पहलू, अमावस्या-पूर्णिमा और ग्रहण। सभी तिथियाँ JPL DE421 एफ़ेमेरिस के अनुसार हैं, भाव — सौर: मीन — पहला भाव।

मीन का स्वामी ग्रह

राशि का स्वामी ग्रह — बृहस्पति। परंपरा के अनुसार मीन के लिए इसकी स्थिति और पहलू अन्य राशियों की तुलना में अधिक मायने रखते हैं: स्वामी ग्रह के शुभ पहलू पूरी अवधि को मज़बूत करते हैं, तनावपूर्ण पहलू उसे कठिन बनाते हैं।

मीन राशिफल — अन्य अवधियों के लिए

यह पाठ सभी मीन राशि वालों के लिए एक जैसा है — राशि के अनुसार राशिफल ऐसे ही बनता है, और इसकी भविष्यवाणी की शक्ति सिद्ध नहीं है। व्यक्तिगत तस्वीर जन्म कुंडली पर गोचर और वर्षफल में दिखती है, और राशि का स्वभाव — मीन पेज पर।

दूसरी राशियों का 2027 का राशिफल