कन्या राशिफल 2027
कन्या (23 अगस्त — 22 सितंबर) का 2027 का राशिफल: बृहस्पति और शनि के अनुसार वर्ष के मुख्य विषय, ग्रहण और वक्री ग्रह, प्रेम, काम और धन के लिए सबसे अच्छे महीने और हर महीने का विस्तृत विश्लेषण।
साल संक्षेप में
26 जुलाई तक। बृहस्पति बारहवें भाव में: नए चक्र से पहले का शांत वर्ष — परंपरा के अनुसार विश्राम, आत्मचिंतन और दूसरों की मदद का समय।
26 जुलाई से। बृहस्पति आपकी सूर्य राशि में — ऐसा 12 साल में एक बार होता है और लगभग एक साल चलता है। परंपरा के अनुसार यह विकास का वर्ष है: नए अवसर, आत्मविश्वास, बड़ी योजनाएँ; दूसरा पहलू — अपनी क्षमता को ज़रूरत से ज़्यादा आँकना।
बृहस्पति इस समय वक्री है — ऐसा साल में लगभग चार महीने होता है। परंपरा के अनुसार विकास भीतर की ओर होता है: योजनाओं पर पुनर्विचार का समय, विस्तार का नहीं।
शनि आठवें भाव में: क़र्ज़, लोन और टैक्स व्यवस्था माँगते हैं; परंपरा के अनुसार यह कठिन, पर ज़रूरी बदलावों का दौर है।
शनि इस समय वक्री है — साल में लगभग साढ़े चार महीने। परंपरा के अनुसार — अधूरी ज़िम्मेदारियों पर लौटने का समय।
परंपरा के अनुसार अवधि का स्वर हल्का है: सामंजस्यपूर्ण पहलू (94) तनावपूर्ण पहलुओं (75) से साफ़ तौर पर ज़्यादा हैं। काम आगे बढ़ाने और जो चाहिए वह माँगने का अच्छा समय।
ग्रहों की स्थितियाँ, पहलू और ग्रहण — JPL DE421 एफ़ेमेरिस के अनुसार। भाव राशि से गिने जाते हैं: राशि स्वयं पहला भाव है, अगली दूसरा, और इसी तरह आगे। अच्छे और कठिन दिन परंपरा के नियमों से चुने गए हैं: चंद्रमा का भाव, ग्रहों की स्थितियाँ, दिन के पहलू, अमावस्या, पूर्णिमा और ग्रहण।
साल की घटनाएँ
ग्रहण
6 फ़रवरी — अमावस्या — कुंभ में, छठा भाव। वलयाकार सूर्य ग्रहण। छठे भाव में अमावस्या काम और सेहत में नया चक्र शुरू करती है। परंपरा के अनुसार ज़िम्मेदारियों को व्यवस्थित करने, दिनचर्या बदलने, इलाज या व्यायाम कार्यक्रम शुरू करने या नौकरी खोजने का समय। परंपरा के अनुसार ग्रहण सामान्य अमावस्या या पूर्णिमा से ज़्यादा और कई महीनों तक असर करता है: इस क्षेत्र की घटनाएँ अचानक आती हैं, और सलाह दी जाती है कि अहम शुरुआतें उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले-बाद न रखें।
21 फ़रवरी — पूर्णिमा — कन्या में, पहला भाव। उपच्छाया चंद्र ग्रहण। आपकी राशि में पूर्णिमा निजी शक्ति और भावनाओं का शिखर है। परंपरा के अनुसार दिखता है कि पिछले महीनों की मेहनत कहाँ तक पहुँची; रिश्तों (सामने का सातवाँ भाव) में संतुलन चाहिए — सब कुछ अपनी ओर न खींचें। परंपरा के अनुसार ग्रहण सामान्य अमावस्या या पूर्णिमा से ज़्यादा और कई महीनों तक असर करता है: इस क्षेत्र की घटनाएँ अचानक आती हैं, और सलाह दी जाती है कि अहम शुरुआतें उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले-बाद न रखें।
18 जुलाई — पूर्णिमा — मकर में, पाँचवाँ भाव। उपच्छाया चंद्र ग्रहण। पाँचवें भाव में पूर्णिमा प्रेम और रचनात्मकता का चरम है: भावनाएँ ज़्यादा तीव्र, इज़हार और रोमांटिक मोड़। परंपरा के अनुसार जुए में पैसा दाँव पर न लगाएँ। परंपरा के अनुसार ग्रहण सामान्य अमावस्या या पूर्णिमा से ज़्यादा और कई महीनों तक असर करता है: इस क्षेत्र की घटनाएँ अचानक आती हैं, और सलाह दी जाती है कि अहम शुरुआतें उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले-बाद न रखें।
2 अगस्त — अमावस्या — सिंह में, बारहवाँ भाव। पूर्ण सूर्य ग्रहण। बारहवें भाव में अमावस्या एक शांत शुरुआत है। परंपरा के अनुसार यह धूमधाम से शुरुआत का नहीं, बल्कि आराम, पुराने काम निपटाने, एकांत और भीतरी काम का समय है। परंपरा के अनुसार ग्रहण सामान्य अमावस्या या पूर्णिमा से ज़्यादा और कई महीनों तक असर करता है: इस क्षेत्र की घटनाएँ अचानक आती हैं, और सलाह दी जाती है कि अहम शुरुआतें उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले-बाद न रखें।
17 अगस्त — पूर्णिमा — कुंभ में, छठा भाव। उपच्छाया चंद्र ग्रहण। छठे भाव में पूर्णिमा काम के बोझ का हिसाब देती है: परंपरा के अनुसार दिखाती है कि कहाँ आपने ज़रूरत से ज़्यादा काम किया। अधूरे काम निपटाने और शरीर की सुनने का समय। परंपरा के अनुसार ग्रहण सामान्य अमावस्या या पूर्णिमा से ज़्यादा और कई महीनों तक असर करता है: इस क्षेत्र की घटनाएँ अचानक आती हैं, और सलाह दी जाती है कि अहम शुरुआतें उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले-बाद न रखें।
वक्री अवधियाँ
- बुध: 9 फ़रवरी – 3 मार्च, मीन में, सातवाँ भाव → कुंभ में, छठा भाव
- बुध: 10 जून – 5 जुलाई, कर्क में, ग्यारहवाँ भाव → मिथुन में, दसवाँ भाव
- बुध: 7 अक्टूबर – 28 अक्टूबर, वृश्चिक में, तीसरा भाव → तुला में, दूसरा भाव
- मंगल: 10 जनवरी – 1 अप्रैल, कन्या में, पहला भाव → सिंह में, बारहवाँ भाव
- बृहस्पति: साल की शुरुआत – 13 अप्रैल, सिंह में, बारहवाँ भाव
- शनि: 9 अगस्त – 24 दिसंबर, मेष में, आठवाँ भाव
परंपरा के अनुसार वक्री ग्रह अपने विषयों में कमज़ोर होता है: बुध — अनुबंध, तकनीक, यात्राएँ; शुक्र — प्रेम और बड़ी ख़रीदारी; मंगल — नई शुरुआतें और विवाद; बृहस्पति और शनि — दीर्घकालिक योजनाएँ। इन क्षेत्रों में नया काम इन अवधियों के बाहर शुरू करना बेहतर है।
बृहस्पति और शनि राशि बदलते हैं
26 जुलाई — बृहस्पति राशि बदलता है: अब कन्या में, पहला भाव। बृहस्पति आपकी सूर्य राशि में — ऐसा 12 साल में एक बार होता है और लगभग एक साल चलता है। परंपरा के अनुसार यह विकास का वर्ष है: नए अवसर, आत्मविश्वास, बड़ी योजनाएँ; दूसरा पहलू — अपनी क्षमता को ज़रूरत से ज़्यादा आँकना।
प्रेम और रिश्ते
शुक्र, 3 फ़रवरी – 1 मार्च: मकर में, पाँचवाँ भाव। पाँचवें भाव में शुक्र परंपरा के अनुसार रोमांस की सबसे अच्छी स्थिति है: मुलाक़ातें, प्यार में पड़ना, आनंद, उपहार। अगर आप अकेले हैं, तो यह किसी से मिलने का समय है।
शुक्र, 26 मार्च – 20 अप्रैल: मीन में, सातवाँ भाव। सातवें भाव में शुक्र परंपरा के अनुसार मिलन का समय है: जोड़े में सामंजस्य, सुलह, सगाई या विवाह के लिए अच्छा समय। अकेले लोग दूसरों के ज़रिए किसी से मिलते हैं।
शुक्र, 21 अगस्त – 14 सितंबर: कन्या में, पहला भाव। आपकी राशि में शुक्र परंपरा के अनुसार प्रेम के लिए साल का सबसे अच्छा समय है: आप आकर्षक हैं और ध्यान अपने आप मिलता है। जान-पहचान बढ़ाने और अलमारी व छवि को नया रूप देने के लिए अच्छा।
शुक्र, 25 नवंबर – 20 दिसंबर: मकर में, पाँचवाँ भाव। पाँचवें भाव में शुक्र परंपरा के अनुसार रोमांस की सबसे अच्छी स्थिति है: मुलाक़ातें, प्यार में पड़ना, आनंद, उपहार। अगर आप अकेले हैं, तो यह किसी से मिलने का समय है।
मंगल, साल की शुरुआत – 21 फ़रवरी: कन्या में, पहला भाव। आपकी राशि में मंगल: जुनून और जोश — पहला कदम आप उठाते हैं। परंपरा के अनुसार प्रेम में भी और झगड़े में भी जल्दी भड़कना आसान है: अपने लहजे पर ध्यान दें।
मंगल, 14 मई – 15 जुलाई: कन्या में, पहला भाव। आपकी राशि में मंगल: जुनून और जोश — पहला कदम आप उठाते हैं। परंपरा के अनुसार प्रेम में भी और झगड़े में भी जल्दी भड़कना आसान है: अपने लहजे पर ध्यान दें।
मंगल, 26 नवंबर – साल का अंत: मकर में, पाँचवाँ भाव। पाँचवें भाव में मंगल परंपरा के अनुसार जुनून का समय है: तीव्र आकर्षण, प्रेम-निवेदन का रोमांच, जीवंत मुलाक़ातें। जोखिम — ईर्ष्या और आवेगी कदम।
कुल अंकों के अनुसार सबसे अच्छे महीने: फ़रवरी, मार्च, अप्रैल।
काम और करियर
आठवें भाव में शनि: क़र्ज़, कर और दूसरों के प्रति दायित्व आपकी आज़ादी सीमित करते हैं। परंपरा के अनुसार क़र्ज़ चुकाने और कारोबार के वित्त को व्यवस्थित करने का समय।
मंगल, साल की शुरुआत – 21 फ़रवरी: कन्या में, पहला भाव। आपकी राशि में मंगल: भरपूर ऊर्जा और पहल — परंपरा के अनुसार कठिन काम हाथ में लेने और अपनी बात आगे बढ़ाने का समय। दूसरा पहलू — अधीरता और धीमे लोगों से टकराव।
मंगल, 14 मई – 15 जुलाई: कन्या में, पहला भाव। आपकी राशि में मंगल: भरपूर ऊर्जा और पहल — परंपरा के अनुसार कठिन काम हाथ में लेने और अपनी बात आगे बढ़ाने का समय। दूसरा पहलू — अधीरता और धीमे लोगों से टकराव।
इस साल बुध की वक्री अवधियाँ: 3 (तारीख़ें ऊपर «वक्री अवधियाँ» में हैं)। इन हफ़्तों में परंपरा के अनुसार अनुबंध, तकनीक और यात्राएँ दोहरी जाँच माँगती हैं।
कुल अंकों के अनुसार सबसे अच्छे महीने: मार्च, मई, जून।
धन
26 जुलाई तक। बारहवें भाव में बृहस्पति: पैसा चुपचाप निकल जाता है — दूसरों की मदद, इलाज, आराम पर। परंपरा के अनुसार दान और पुराने क़र्ज़ चुकाने के लिए अच्छा, जोखिम के लिए नहीं।
26 जुलाई से। आपकी राशि में बृहस्पति: परंपरा के अनुसार ऐसा साल जब अवसर अपने आप आते हैं — कमाई निजी पहल से बढ़ती है। मुख्य जोखिम — ख़ुद को ज़्यादा आँकना और ज़्यादा ख़र्च करना।
शुक्र, 20 अप्रैल – 15 मई: मेष में, आठवाँ भाव। आठवें भाव में शुक्र: उपहार, साथी का पैसा, सफल क़र्ज़। परंपरा के अनुसार साझा वित्त पर बातचीत का अच्छा समय।
शुक्र, 3 जुलाई – 27 जुलाई: कर्क में, ग्यारहवाँ भाव। ग्यारहवें भाव में शुक्र: दोस्तों और संपर्कों के ज़रिए पैसा, उपहार, छोटी वित्तीय इच्छाओं का पूरा होना।
शुक्र, 14 सितंबर – 8 अक्टूबर: तुला में, दूसरा भाव। दूसरे भाव में शुक्र परंपरा के अनुसार धन के लिए उसकी सबसे अच्छी स्थितियों में से एक है: आय आसानी से आती है, सुंदर और गुणवत्तापूर्ण चीज़ों की ख़रीद सफल रहती है।
कुल अंकों के अनुसार सबसे अच्छे महीने: अप्रैल, जुलाई, सितंबर।
सेहत और ऊर्जा
मंगल, साल की शुरुआत – 21 फ़रवरी: कन्या में, पहला भाव। आपकी राशि में मंगल: भरपूर ऊर्जा, पर परंपरा के अनुसार जल्दबाज़ी से चोट, कटने, जलने, सिरदर्द और बुख़ार का जोखिम ज़्यादा। खेल सबसे अच्छा निकास है।
मंगल, 21 फ़रवरी – 14 मई: सिंह में, बारहवाँ भाव। बारहवें भाव में मंगल परंपरा के अनुसार छिपी थकान है: ऊर्जा चुपचाप निकल जाती है, अनिद्रा और बिना साफ़ कारण की अस्वस्थता संभव। ज़्यादा नींद, कम बोझ।
मंगल, 14 मई – 15 जुलाई: कन्या में, पहला भाव। आपकी राशि में मंगल: भरपूर ऊर्जा, पर परंपरा के अनुसार जल्दबाज़ी से चोट, कटने, जलने, सिरदर्द और बुख़ार का जोखिम ज़्यादा। खेल सबसे अच्छा निकास है।
आठवें भाव में शनि: परंपरा के अनुसार ताक़त सामान्य से धीरे लौटती है; नियमित जाँच न छोड़ें।
मंगल इस समय वक्री है। परंपरा के अनुसार काम अटकते हैं और पुराने टकराव लौट आते हैं — ऊर्जा उन कामों में लगाना बेहतर है, जो पहले से शुरू हो चुके हैं।
ये सेहत के बारे में ज्योतिषीय सुझाव हैं, चिकित्सा सलाह नहीं: तबीयत ठीक न लगे तो डॉक्टर से मिलें।
कुल अंकों के अनुसार सबसे अच्छे महीने: अगस्त, सितंबर, दिसंबर।
यूरेनस, नेपच्यून और प्लूटो
दसवें भाव में यूरेनस: करियर में अचानक मोड़ — पेशा बदलना, स्वतंत्रता, अपना काम। परंपरा के अनुसार अभी स्थिरता प्राथमिकता नहीं है।
आठवें भाव में नेपच्यून: साझा धन और दूसरों के दायित्वों पर धुंध। परंपरा के अनुसार हर वित्तीय बात लिखित में हो और जाँची जाए।
छठे भाव में प्लूटो: काम और जीवनशैली का पुनर्निर्माण। परंपरा के अनुसार सेहत के लिए आदतों को दृढ़ता से बदलने का समय।
महीना-दर-महीना
जनवरी तनावपूर्ण महीना
सूर्य — आपका पाँचवाँ भाव: प्रेम, संतान, रचनात्मकता। 7 जनवरी को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका चौथा भाव। 8 जनवरी को अमावस्या — पाँचवाँ भाव (प्रेम, संतान, रचनात्मकता)। 10 जनवरी को मंगल वक्री होता है। 13 जनवरी को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका छठा भाव। 20 जनवरी को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका छठा भाव। 22 जनवरी को पूर्णिमा — बारहवाँ भाव (विश्राम और एकांत)।
महीने के अच्छे दिन: 1, 14, 22।
फ़रवरी तनावपूर्ण महीना
सूर्य — आपका छठा भाव: काम और स्वास्थ्य। 1 फ़रवरी को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका सातवाँ भाव। 3 फ़रवरी को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका पाँचवाँ भाव। 6 फ़रवरी को वलयाकार सूर्य ग्रहण — छठा भाव (काम और स्वास्थ्य)। 8 फ़रवरी को यूरेनस मार्गी होता है। 9 फ़रवरी को बुध वक्री होता है। 18 फ़रवरी को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका छठा भाव। 19 फ़रवरी को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका सातवाँ भाव। 21 फ़रवरी को उपच्छाया चंद्र ग्रहण — पहला भाव (व्यक्तित्व और सेहत)। 21 फ़रवरी को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका बारहवाँ भाव।
महीने के अच्छे दिन: 4, 8, 22।
मार्च संतुलित महीना
सूर्य — आपका सातवाँ भाव: साझेदार और अनुबंध। 1 मार्च को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका छठा भाव। 3 मार्च को बुध मार्गी होता है। 8 मार्च को अमावस्या — सातवाँ भाव (साझेदार और अनुबंध)। 18 मार्च को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका सातवाँ भाव। 21 मार्च को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका आठवाँ भाव। 22 मार्च को पूर्णिमा — दूसरा भाव (धन और संपत्ति)। 26 मार्च को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका सातवाँ भाव।
महीने के अच्छे दिन: 4, 6, 13।
अप्रैल अच्छा महीना
सूर्य — आपका आठवाँ भाव: साझा धन और बदलाव। 1 अप्रैल को मंगल मार्गी होता है। 7 अप्रैल को अमावस्या — आठवाँ भाव (साझा धन और बदलाव)। 9 अप्रैल को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका आठवाँ भाव। 13 अप्रैल को बृहस्पति मार्गी होता है। 20 अप्रैल को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका आठवाँ भाव। 20 अप्रैल को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका नौवाँ भाव। 21 अप्रैल को पूर्णिमा — तीसरा भाव (संवाद और यात्राएँ)। 25 अप्रैल को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका नौवाँ भाव।
महीने के अच्छे दिन: 11, 13, 18।
मई तनावपूर्ण महीना
सूर्य — आपका नौवाँ भाव: लंबी यात्राएँ और पढ़ाई। 6 मई को अमावस्या — नौवाँ भाव (लंबी यात्राएँ और पढ़ाई)। 8 मई को प्लूटो वक्री होता है। 9 मई को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका दसवाँ भाव। 14 मई को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका पहला भाव। 15 मई को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका नौवाँ भाव। 20 मई को पूर्णिमा — तीसरा भाव (संवाद और यात्राएँ)। 21 मई को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका दसवाँ भाव। 28 मई को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका ग्यारहवाँ भाव।
महीने के अच्छे दिन: 12, 15, 28।
जून संतुलित महीना
सूर्य — आपका दसवाँ भाव: करियर और प्रतिष्ठा। 5 जून को अमावस्या — दसवाँ भाव (करियर और प्रतिष्ठा)। 8 जून को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका दसवाँ भाव। 10 जून को बुध वक्री होता है। 19 जून को पूर्णिमा — चौथा भाव (घर और परिवार)। 21 जून को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका ग्यारहवाँ भाव। 26 जून को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका दसवाँ भाव।
महीने के अच्छे दिन: 13, 14, 30।
जुलाई संतुलित महीना
सूर्य — आपका ग्यारहवाँ भाव: मित्र और योजनाएँ। 3 जुलाई को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका ग्यारहवाँ भाव। 4 जुलाई को अमावस्या — ग्यारहवाँ भाव (मित्र और योजनाएँ)। 5 जुलाई को बुध मार्गी होता है। 10 जुलाई को नेपच्यून वक्री होता है। 12 जुलाई को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका ग्यारहवाँ भाव। 15 जुलाई को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका दूसरा भाव। 18 जुलाई को उपच्छाया चंद्र ग्रहण — पाँचवाँ भाव (प्रेम, संतान, रचनात्मकता)। 23 जुलाई को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका बारहवाँ भाव। 26 जुलाई को बृहस्पति आगे बढ़ता है: अब आपका पहला भाव। 27 जुलाई को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका बारहवाँ भाव।
महीने के अच्छे दिन: 1, 12, 30।
अगस्त संतुलित महीना
सूर्य — आपका बारहवाँ भाव: विश्राम और एकांत। 2 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण — बारहवाँ भाव (विश्राम और एकांत)। 2 अगस्त को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका बारहवाँ भाव। 9 अगस्त को शनि वक्री होता है। 17 अगस्त को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका पहला भाव। 17 अगस्त को उपच्छाया चंद्र ग्रहण — छठा भाव (काम और स्वास्थ्य)। 21 अगस्त को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका पहला भाव। 23 अगस्त को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका पहला भाव। 31 अगस्त को अमावस्या — पहला भाव (व्यक्तित्व और सेहत)।
महीने के अच्छे दिन: 4, 26, 31।
सितंबर अच्छा महीना
सूर्य — आपका पहला भाव: व्यक्तित्व और सेहत। 2 सितंबर को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका तीसरा भाव। 3 सितंबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका दूसरा भाव। 14 सितंबर को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका दूसरा भाव। 15 सितंबर को यूरेनस वक्री होता है। 16 सितंबर को पूर्णिमा — सातवाँ भाव (साझेदार और अनुबंध)। 23 सितंबर को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका दूसरा भाव। 27 सितंबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका तीसरा भाव। 30 सितंबर को अमावस्या — दूसरा भाव (धन और संपत्ति)।
महीने के अच्छे दिन: 20, 22, 24।
अक्टूबर संतुलित महीना
सूर्य — आपका दूसरा भाव: धन और संपत्ति। 7 अक्टूबर को बुध वक्री होता है। 8 अक्टूबर को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका तीसरा भाव। 15 अक्टूबर को पूर्णिमा — आठवाँ भाव (साझा धन और बदलाव)। 16 अक्टूबर को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका चौथा भाव। 16 अक्टूबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका दूसरा भाव। 18 अक्टूबर को प्लूटो मार्गी होता है। 23 अक्टूबर को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका तीसरा भाव। 28 अक्टूबर को बुध मार्गी होता है। 29 अक्टूबर को अमावस्या — तीसरा भाव (संवाद और यात्राएँ)।
महीने के अच्छे दिन: 1, 3, 22।
नवंबर संतुलित महीना
सूर्य — आपका तीसरा भाव: संवाद और यात्राएँ। 1 नवंबर को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका चौथा भाव। 10 नवंबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका तीसरा भाव। 14 नवंबर को पूर्णिमा — नौवाँ भाव (लंबी यात्राएँ और पढ़ाई)। 22 नवंबर को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका चौथा भाव। 25 नवंबर को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका पाँचवाँ भाव। 26 नवंबर को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका पाँचवाँ भाव। 28 नवंबर को अमावस्या — चौथा भाव (घर और परिवार)। 29 नवंबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका चौथा भाव।
महीने के अच्छे दिन: 5, 15, 27।
दिसंबर अच्छा महीना
सूर्य — आपका चौथा भाव: घर और परिवार। 13 दिसंबर को पूर्णिमा — दसवाँ भाव (करियर और प्रतिष्ठा)। 15 दिसंबर को नेपच्यून मार्गी होता है। 18 दिसंबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका पाँचवाँ भाव। 20 दिसंबर को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका छठा भाव। 22 दिसंबर को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका पाँचवाँ भाव। 24 दिसंबर को शनि मार्गी होता है। 28 दिसंबर को अमावस्या — पाँचवाँ भाव (प्रेम, संतान, रचनात्मकता)।
महीने के अच्छे दिन: 2, 13, 25।
यह राशिफल कैसे बनाया गया है
2027 का राशिफल धीमे ग्रहों पर बना है: कन्या के लिए बृहस्पति और शनि कहाँ हैं, यूरेनस, नेपच्यून और प्लूटो किन भावों से गुज़रते हैं, ग्रहण किन भावों में पड़ते हैं और ग्रह कब वक्री होते हैं। यही वर्ष के मुख्य विषय हैं — इन्हें न दिन बदलते हैं, न हफ़्ते।
महीनेवार विश्लेषण और प्रेम, काम, धन व ऊर्जा के लिए सबसे अच्छे महीने — महीने के सभी दिनों के अंकों का योग: चंद्रमा का भाव, शुक्र, मंगल, बृहस्पति और शनि की स्थितियाँ, वक्री अवधियाँ, दृष्टियाँ, अमावस्या-पूर्णिमा और ग्रहण। सभी तारीख़ें — JPL DE421 एफ़ेमेरिस के अनुसार, भाव — सौर (सोलर हाउस): कन्या — पहला भाव।
कन्या का स्वामी
राशि का स्वामी — बुध। परंपरा के अनुसार कन्या के लिए उसकी स्थिति और दृष्टियाँ दूसरी राशियों से ज़्यादा मायने रखती हैं: स्वामी की शुभ दृष्टियाँ पूरी अवधि को मज़बूत करती हैं, तनावपूर्ण — उसे कठिन बनाती हैं।
कन्या राशिफल — दूसरी अवधियों के लिए
यह पाठ सभी कन्या राशि वालों के लिए एक जैसा है — राशि का राशिफल ऐसे ही बनता है, और उसकी कोई सिद्ध भविष्यसूचक शक्ति नहीं है। व्यक्तिगत तस्वीर — जन्म कुंडली पर गोचर में और वर्षफल (सोलर रिटर्न) में, राशि का स्वभाव — कन्या पेज पर।