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वर्ष 2027

वृषभ राशिफल 2027

वृषभ (20 अप्रैल — 20 मई) के लिए 2027 का राशिफल: बृहस्पति और शनि के अनुसार वर्ष के मुख्य विषय, ग्रहण और वक्री ग्रह, प्रेम, काम और धन के लिए सबसे अच्छे महीने और हर महीने का विस्तृत विश्लेषण।

वृषभ · राशिफल 2027
4 → 5बृहस्पति का भाव
12शनि का भाव
अग॰, सित॰, अक्टू॰सबसे अच्छे महीने

साल संक्षेप में

बृहस्पति — सिंह में, चौथा भाव; 26 जुलाई से — कन्या में, पाँचवाँ भाव वक्री

26 जुलाई तक। बृहस्पति चौथे भाव में: घर और परिवार का वर्ष — परंपरा घर बदलने, घर के विस्तार और परिवार में नए सदस्य के आगमन को इसके विषय मानती है।

26 जुलाई से। बृहस्पति पाँचवें भाव में: परंपरा के अनुसार सबसे अच्छे वर्षों में से एक — प्रेम, संतान, रचनात्मकता और आनंद के लिए।

बृहस्पति इस समय वक्री है — ऐसा साल में लगभग चार महीने होता है। परंपरा के अनुसार विकास भीतर की ओर होता है: योजनाओं पर पुनर्विचार का समय, विस्तार का नहीं।

शनि — मेष में, बारहवाँ भाव वक्री

शनि बारहवें भाव में: परंपरा के अनुसार नए 29-वर्षीय चक्र से पहले पुराना पूरा करने और जमा हुए बोझ को निपटाने का समय।

शनि इस समय वक्री है — साल में लगभग साढ़े चार महीने। परंपरा के अनुसार — अधूरी ज़िम्मेदारियों पर लौटने का समय।

परंपरा के अनुसार अवधि का स्वर हल्का है: सामंजस्यपूर्ण पहलू (94) तनावपूर्ण पहलुओं (75) से साफ़ तौर पर ज़्यादा हैं। काम आगे बढ़ाने और जो चाहिए वह माँगने का अच्छा समय।

ग्रहों की स्थितियाँ, पहलू और ग्रहण — JPL DE421 एफ़ेमेरिस के अनुसार। भाव राशि से गिने जाते हैं: राशि स्वयं पहला भाव है, अगली दूसरा, और इसी तरह आगे। अच्छे और कठिन दिन परंपरा के नियमों से चुने गए हैं: चंद्रमा का भाव, ग्रहों की स्थितियाँ, दिन के पहलू, अमावस्या, पूर्णिमा और ग्रहण।

साल की घटनाएँ

ग्रहण

6 फ़रवरी — अमावस्या — कुंभ में, दसवाँ भाव। वलयाकार सूर्य ग्रहण। दसवें भाव में अमावस्या परंपरा के अनुसार महीने की करियर की सबसे अहम शुरुआत है: नया पद, परियोजना, आवेदन, भविष्य के बारे में वरिष्ठों से बातचीत। परंपरा के अनुसार ग्रहण सामान्य अमावस्या या पूर्णिमा से ज़्यादा और कई महीनों तक असर करता है: इस क्षेत्र की घटनाएँ अचानक आती हैं, और सलाह दी जाती है कि अहम शुरुआतें उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले-बाद न रखें।

21 फ़रवरी — पूर्णिमा — कन्या में, पाँचवाँ भाव। उपच्छाया चंद्र ग्रहण। पाँचवें भाव में पूर्णिमा प्रेम और रचनात्मकता का चरम है: भावनाएँ ज़्यादा तीव्र, इज़हार और रोमांटिक मोड़। परंपरा के अनुसार जुए में पैसा दाँव पर न लगाएँ। परंपरा के अनुसार ग्रहण सामान्य अमावस्या या पूर्णिमा से ज़्यादा और कई महीनों तक असर करता है: इस क्षेत्र की घटनाएँ अचानक आती हैं, और सलाह दी जाती है कि अहम शुरुआतें उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले-बाद न रखें।

18 जुलाई — पूर्णिमा — मकर में, नौवाँ भाव। उपच्छाया चंद्र ग्रहण। नौवें भाव में पूर्णिमा पढ़ाई, यात्रा और क़ानूनी मामलों में नतीजे लाती है: परीक्षा परिणाम और फ़ैसले आते हैं। परंपरा के अनुसार शुरू करने से ज़्यादा पूरा करने का अच्छा समय। परंपरा के अनुसार ग्रहण सामान्य अमावस्या या पूर्णिमा से ज़्यादा और कई महीनों तक असर करता है: इस क्षेत्र की घटनाएँ अचानक आती हैं, और सलाह दी जाती है कि अहम शुरुआतें उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले-बाद न रखें।

2 अगस्त — अमावस्या — सिंह में, चौथा भाव। पूर्ण सूर्य ग्रहण। चौथे भाव में अमावस्या घर में नई शुरुआत है। परंपरा के अनुसार घर बदलने, मरम्मत, फ़र्नीचर ख़रीदने, पारिवारिक फ़ैसलों और माता-पिता से बातचीत का समय। परंपरा के अनुसार ग्रहण सामान्य अमावस्या या पूर्णिमा से ज़्यादा और कई महीनों तक असर करता है: इस क्षेत्र की घटनाएँ अचानक आती हैं, और सलाह दी जाती है कि अहम शुरुआतें उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले-बाद न रखें।

17 अगस्त — पूर्णिमा — कुंभ में, दसवाँ भाव। उपच्छाया चंद्र ग्रहण। दसवें भाव में पूर्णिमा करियर का चरम है: परंपरा के अनुसार आपके काम के नतीजे सबके सामने हैं और उनका आकलन होता है। घर और परिवार (सामने का चौथा भाव) को भी ध्यान चाहिए। परंपरा के अनुसार ग्रहण सामान्य अमावस्या या पूर्णिमा से ज़्यादा और कई महीनों तक असर करता है: इस क्षेत्र की घटनाएँ अचानक आती हैं, और सलाह दी जाती है कि अहम शुरुआतें उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले-बाद न रखें।

वक्री अवधियाँ

  • बुध: 9 फ़रवरी – 3 मार्च, मीन में, ग्यारहवाँ भाव → कुंभ में, दसवाँ भाव
  • बुध: 10 जून – 5 जुलाई, कर्क में, तीसरा भाव → मिथुन में, दूसरा भाव
  • बुध: 7 अक्टूबर – 28 अक्टूबर, वृश्चिक में, सातवाँ भाव → तुला में, छठा भाव
  • मंगल: 10 जनवरी – 1 अप्रैल, कन्या में, पाँचवाँ भाव → सिंह में, चौथा भाव
  • बृहस्पति: साल की शुरुआत – 13 अप्रैल, सिंह में, चौथा भाव
  • शनि: 9 अगस्त – 24 दिसंबर, मेष में, बारहवाँ भाव

परंपरा के अनुसार वक्री ग्रह अपने विषयों में कमज़ोर होता है: बुध — अनुबंध, तकनीक, यात्राएँ; शुक्र — प्रेम और बड़ी ख़रीदारी; मंगल — नई शुरुआतें और विवाद; बृहस्पति और शनि — दीर्घकालिक योजनाएँ। इन क्षेत्रों में नया काम इन अवधियों के बाहर शुरू करना बेहतर है।

बृहस्पति और शनि राशि बदलते हैं

26 जुलाई — बृहस्पति राशि बदलता है: अब कन्या में, पाँचवाँ भाव। बृहस्पति पाँचवें भाव में: परंपरा के अनुसार सबसे अच्छे वर्षों में से एक — प्रेम, संतान, रचनात्मकता और आनंद के लिए।

प्रेम और रिश्ते

शुक्र, साल की शुरुआत – 7 जनवरी: वृश्चिक में, सातवाँ भाव। सातवें भाव में शुक्र परंपरा के अनुसार मिलन का समय है: जोड़े में सामंजस्य, सुलह, सगाई या विवाह के लिए अच्छा समय। अकेले लोग दूसरों के ज़रिए किसी से मिलते हैं।

शुक्र, 15 मई – 8 जून: वृषभ में, पहला भाव। आपकी राशि में शुक्र परंपरा के अनुसार प्रेम के लिए साल का सबसे अच्छा समय है: आप आकर्षक हैं और ध्यान अपने आप मिलता है। जान-पहचान बढ़ाने और अलमारी व छवि को नया रूप देने के लिए अच्छा।

शुक्र, 21 अगस्त – 14 सितंबर: कन्या में, पाँचवाँ भाव। पाँचवें भाव में शुक्र परंपरा के अनुसार रोमांस की सबसे अच्छी स्थिति है: मुलाक़ातें, प्यार में पड़ना, आनंद, उपहार। अगर आप अकेले हैं, तो यह किसी से मिलने का समय है।

शुक्र, 8 अक्टूबर – 1 नवंबर: वृश्चिक में, सातवाँ भाव। सातवें भाव में शुक्र परंपरा के अनुसार मिलन का समय है: जोड़े में सामंजस्य, सुलह, सगाई या विवाह के लिए अच्छा समय। अकेले लोग दूसरों के ज़रिए किसी से मिलते हैं।

मंगल, साल की शुरुआत – 21 फ़रवरी: कन्या में, पाँचवाँ भाव। पाँचवें भाव में मंगल परंपरा के अनुसार जुनून का समय है: तीव्र आकर्षण, प्रेम-निवेदन का रोमांच, जीवंत मुलाक़ातें। जोखिम — ईर्ष्या और आवेगी कदम।

मंगल, 14 मई – 15 जुलाई: कन्या में, पाँचवाँ भाव। पाँचवें भाव में मंगल परंपरा के अनुसार जुनून का समय है: तीव्र आकर्षण, प्रेम-निवेदन का रोमांच, जीवंत मुलाक़ातें। जोखिम — ईर्ष्या और आवेगी कदम।

मंगल, 2 सितंबर – 16 अक्टूबर: वृश्चिक में, सातवाँ भाव। सातवें भाव में मंगल परंपरा के अनुसार जोड़े में खुले टकराव का समय है: जो जमा हुआ है वह बाहर आता है। बहस ठीक है, जंग नहीं; जुनून भी प्रबल है।

मंगल, 16 अक्टूबर – 26 नवंबर: धनु में, आठवाँ भाव। आठवें भाव में मंगल: तीव्र जुनून और नियंत्रण की खींचतान। परंपरा के अनुसार दबाव न डालना और ईर्ष्या न करना ज़रूरी है; अंतरंगता सामने आती है।

बृहस्पति, 26 जुलाई – साल का अंत: कन्या में, पाँचवाँ भाव। बृहस्पति पाँचवें भाव में: परंपरा के अनुसार सबसे अच्छे वर्षों में से एक — प्रेम, संतान, रचनात्मकता और आनंद के लिए।

कुल अंकों के अनुसार सबसे अच्छे महीने: अगस्त, अक्टूबर, नवंबर।

काम और करियर

शनि — मेष में, बारहवाँ भाव वक्री

बारहवें भाव में शनि: परंपरा के अनुसार पुरानी परियोजनाएँ समेटने, बिना दिखावे के काम करने और उस नए चक्र की तैयारी का समय, जो शनि के आपकी राशि में आने पर शुरू होगा।

मंगल, 15 जुलाई – 2 सितंबर: तुला में, छठा भाव। छठे भाव में मंगल परंपरा के अनुसार काम के लिए मज़बूत स्थिति है: बहुत काम और बहुत कुछ पूरा। पर सहकर्मियों से घर्षण और ज़रूरत से ज़्यादा काम अक्सर साथ चलते हैं।

इस साल बुध की वक्री अवधियाँ: 3 (तारीख़ें ऊपर «वक्री अवधियाँ» में हैं)। इन हफ़्तों में परंपरा के अनुसार अनुबंध, तकनीक और यात्राएँ दोहरी जाँच माँगती हैं।

कुल अंकों के अनुसार सबसे अच्छे महीने: मार्च, अगस्त, सितंबर।

धन

बृहस्पति — सिंह में, चौथा भाव; 26 जुलाई से — कन्या में, पाँचवाँ भाव वक्री

26 जुलाई तक। चौथे भाव में बृहस्पति: संपत्ति में भाग्य — ख़रीद, घर का विस्तार, परिवार से मदद। परंपरा के अनुसार पैसा घर की ओर बहता है।

26 जुलाई से। पाँचवें भाव में बृहस्पति: रचनात्मकता और शौक़ से आय, ख़ुशी पर ख़ुशी-ख़ुशी ख़र्च। परंपरा के अनुसार जोखिम भरे कामों में भाग्य साथ देता है — पर उसे ज़्यादा न आज़माएँ।

शुक्र, 7 जनवरी – 3 फ़रवरी: धनु में, आठवाँ भाव। आठवें भाव में शुक्र: उपहार, साथी का पैसा, सफल क़र्ज़। परंपरा के अनुसार साझा वित्त पर बातचीत का अच्छा समय।

शुक्र, 26 मार्च – 20 अप्रैल: मीन में, ग्यारहवाँ भाव। ग्यारहवें भाव में शुक्र: दोस्तों और संपर्कों के ज़रिए पैसा, उपहार, छोटी वित्तीय इच्छाओं का पूरा होना।

शुक्र, 8 जून – 3 जुलाई: मिथुन में, दूसरा भाव। दूसरे भाव में शुक्र परंपरा के अनुसार धन के लिए उसकी सबसे अच्छी स्थितियों में से एक है: आय आसानी से आती है, सुंदर और गुणवत्तापूर्ण चीज़ों की ख़रीद सफल रहती है।

शुक्र, 1 नवंबर – 25 नवंबर: धनु में, आठवाँ भाव। आठवें भाव में शुक्र: उपहार, साथी का पैसा, सफल क़र्ज़। परंपरा के अनुसार साझा वित्त पर बातचीत का अच्छा समय।

कुल अंकों के अनुसार सबसे अच्छे महीने: जनवरी, अप्रैल, जून।

सेहत और ऊर्जा

मंगल, 15 जुलाई – 2 सितंबर: तुला में, छठा भाव। छठे भाव में मंगल परंपरा के अनुसार सेहत के लिए मुख्य स्थिति है: ज़्यादा काम, सूजन और तीव्र बीमारी का जोखिम। दिनचर्या, नींद और संतुलित व्यायाम ज़रूरी हैं।

बारहवें भाव में शनि: परंपरा के अनुसार पहले से अपना ख़याल रखने का समय — नींद, आराम, बचाव, ख़ासकर पैरों और रोग-प्रतिरोधक क्षमता के लिए।

मंगल इस समय वक्री है। परंपरा के अनुसार काम अटकते हैं और पुराने टकराव लौट आते हैं — ऊर्जा उन कामों में लगाना बेहतर है, जो पहले से शुरू हो चुके हैं।

ये सेहत के बारे में ज्योतिषीय सुझाव हैं, चिकित्सा सलाह नहीं: तबीयत ठीक न लगे तो डॉक्टर से मिलें।

कुल अंकों के अनुसार सबसे अच्छे महीने: मई, अगस्त, सितंबर।

यूरेनस, नेपच्यून और प्लूटो

यूरेनस — मिथुन में, दूसरा भाव वक्री

दूसरे भाव में यूरेनस: आय उछलती-गिरती है — अचानक आमदनी और अचानक ख़र्च। परंपरा के अनुसार कमाई के नए, अनोखे तरीक़ों का समय।

नेपच्यून — मेष में, बारहवाँ भाव वक्री

बारहवें भाव में नेपच्यून अपने ही भाव में है: परंपरा के अनुसार एकांत, करुणा, ध्यान और सूक्ष्म अंतर्ज्ञान का समय। वास्तविकता से न भागें।

प्लूटो — कुंभ में, दसवाँ भाव वक्री

दसवें भाव में प्लूटो: सत्ता और हैसियत के लिए संघर्ष, पेशे में बदलाव। परंपरा के अनुसार करियर ज़्यादा मज़बूत आधार पर फिर से खड़ा होता है।

महीना-दर-महीना

जनवरी संतुलित महीना

सूर्य — आपका नौवाँ भाव: लंबी यात्राएँ और पढ़ाई। 7 जनवरी को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका आठवाँ भाव। 8 जनवरी को अमावस्या — नौवाँ भाव (लंबी यात्राएँ और पढ़ाई)। 10 जनवरी को मंगल वक्री होता है। 13 जनवरी को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका दसवाँ भाव। 20 जनवरी को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका दसवाँ भाव। 22 जनवरी को पूर्णिमा — चौथा भाव (घर और परिवार)।

महीने के अच्छे दिन: 16, 18, 22।

फ़रवरी तनावपूर्ण महीना

सूर्य — आपका दसवाँ भाव: करियर और प्रतिष्ठा। 1 फ़रवरी को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका ग्यारहवाँ भाव। 3 फ़रवरी को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका नौवाँ भाव। 6 फ़रवरी को वलयाकार सूर्य ग्रहण — दसवाँ भाव (करियर और प्रतिष्ठा)। 8 फ़रवरी को यूरेनस मार्गी होता है। 9 फ़रवरी को बुध वक्री होता है। 18 फ़रवरी को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका दसवाँ भाव। 19 फ़रवरी को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका ग्यारहवाँ भाव। 21 फ़रवरी को उपच्छाया चंद्र ग्रहण — पाँचवाँ भाव (प्रेम, संतान, रचनात्मकता)। 21 फ़रवरी को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका चौथा भाव।

महीने के अच्छे दिन: 3, 8, 14।

मार्च तनावपूर्ण महीना

सूर्य — आपका ग्यारहवाँ भाव: मित्र और योजनाएँ। 1 मार्च को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका दसवाँ भाव। 3 मार्च को बुध मार्गी होता है। 8 मार्च को अमावस्या — ग्यारहवाँ भाव (मित्र और योजनाएँ)। 18 मार्च को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका ग्यारहवाँ भाव। 21 मार्च को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका बारहवाँ भाव। 22 मार्च को पूर्णिमा — छठा भाव (काम और स्वास्थ्य)। 26 मार्च को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका ग्यारहवाँ भाव।

महीने के अच्छे दिन: 4, 6, 13।

अप्रैल संतुलित महीना

सूर्य — आपका बारहवाँ भाव: विश्राम और एकांत। 1 अप्रैल को मंगल मार्गी होता है। 7 अप्रैल को अमावस्या — बारहवाँ भाव (विश्राम और एकांत)। 9 अप्रैल को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका बारहवाँ भाव। 13 अप्रैल को बृहस्पति मार्गी होता है। 20 अप्रैल को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका बारहवाँ भाव। 20 अप्रैल को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका पहला भाव। 21 अप्रैल को पूर्णिमा — सातवाँ भाव (साझेदार और अनुबंध)। 25 अप्रैल को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका पहला भाव।

महीने के अच्छे दिन: 3, 4, 11।

मई संतुलित महीना

सूर्य — आपका पहला भाव: व्यक्तित्व और सेहत। 6 मई को अमावस्या — पहला भाव (व्यक्तित्व और सेहत)। 8 मई को प्लूटो वक्री होता है। 9 मई को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका दूसरा भाव। 14 मई को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका पाँचवाँ भाव। 15 मई को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका पहला भाव। 20 मई को पूर्णिमा — सातवाँ भाव (साझेदार और अनुबंध)। 21 मई को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका दूसरा भाव। 28 मई को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका तीसरा भाव।

महीने के अच्छे दिन: 12, 15, 28।

जून संतुलित महीना

सूर्य — आपका दूसरा भाव: धन और संपत्ति। 5 जून को अमावस्या — दूसरा भाव (धन और संपत्ति)। 8 जून को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका दूसरा भाव। 10 जून को बुध वक्री होता है। 19 जून को पूर्णिमा — आठवाँ भाव (साझा धन और बदलाव)। 21 जून को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका तीसरा भाव। 26 जून को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका दूसरा भाव।

महीने के अच्छे दिन: 14, 29, 30।

जुलाई तनावपूर्ण महीना

सूर्य — आपका तीसरा भाव: संवाद और यात्राएँ। 3 जुलाई को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका तीसरा भाव। 4 जुलाई को अमावस्या — तीसरा भाव (संवाद और यात्राएँ)। 5 जुलाई को बुध मार्गी होता है। 10 जुलाई को नेपच्यून वक्री होता है। 12 जुलाई को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका तीसरा भाव। 15 जुलाई को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका छठा भाव। 18 जुलाई को उपच्छाया चंद्र ग्रहण — नौवाँ भाव (लंबी यात्राएँ और पढ़ाई)। 23 जुलाई को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका चौथा भाव। 26 जुलाई को बृहस्पति आगे बढ़ता है: अब आपका पाँचवाँ भाव। 27 जुलाई को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका चौथा भाव।

महीने के अच्छे दिन: 1, 27, 30।

अगस्त अच्छा महीना

सूर्य — आपका चौथा भाव: घर और परिवार। 2 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण — चौथा भाव (घर और परिवार)। 2 अगस्त को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका चौथा भाव। 9 अगस्त को शनि वक्री होता है। 17 अगस्त को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका पाँचवाँ भाव। 17 अगस्त को उपच्छाया चंद्र ग्रहण — दसवाँ भाव (करियर और प्रतिष्ठा)। 21 अगस्त को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका पाँचवाँ भाव। 23 अगस्त को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका पाँचवाँ भाव। 31 अगस्त को अमावस्या — पाँचवाँ भाव (प्रेम, संतान, रचनात्मकता)।

महीने के अच्छे दिन: 4, 26, 31।

सितंबर अच्छा महीना

सूर्य — आपका पाँचवाँ भाव: प्रेम, संतान, रचनात्मकता। 2 सितंबर को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका सातवाँ भाव। 3 सितंबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका छठा भाव। 14 सितंबर को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका छठा भाव। 15 सितंबर को यूरेनस वक्री होता है। 16 सितंबर को पूर्णिमा — ग्यारहवाँ भाव (मित्र और योजनाएँ)। 23 सितंबर को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका छठा भाव। 27 सितंबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका सातवाँ भाव। 30 सितंबर को अमावस्या — छठा भाव (काम और स्वास्थ्य)।

महीने के अच्छे दिन: 14, 20, 22।

अक्टूबर अच्छा महीना

सूर्य — आपका छठा भाव: काम और स्वास्थ्य। 7 अक्टूबर को बुध वक्री होता है। 8 अक्टूबर को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका सातवाँ भाव। 15 अक्टूबर को पूर्णिमा — बारहवाँ भाव (विश्राम और एकांत)। 16 अक्टूबर को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका आठवाँ भाव। 16 अक्टूबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका छठा भाव। 18 अक्टूबर को प्लूटो मार्गी होता है। 23 अक्टूबर को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका सातवाँ भाव। 28 अक्टूबर को बुध मार्गी होता है। 29 अक्टूबर को अमावस्या — सातवाँ भाव (साझेदार और अनुबंध)।

महीने के अच्छे दिन: 3, 11, 22।

नवंबर संतुलित महीना

सूर्य — आपका सातवाँ भाव: साझेदार और अनुबंध। 1 नवंबर को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका आठवाँ भाव। 10 नवंबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका सातवाँ भाव। 14 नवंबर को पूर्णिमा — पहला भाव (व्यक्तित्व और सेहत)। 22 नवंबर को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका आठवाँ भाव। 25 नवंबर को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका नौवाँ भाव। 26 नवंबर को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका नौवाँ भाव। 28 नवंबर को अमावस्या — आठवाँ भाव (साझा धन और बदलाव)। 29 नवंबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका आठवाँ भाव।

महीने के अच्छे दिन: 5, 15, 19।

दिसंबर संतुलित महीना

सूर्य — आपका आठवाँ भाव: साझा धन और बदलाव। 13 दिसंबर को पूर्णिमा — दूसरा भाव (धन और संपत्ति)। 15 दिसंबर को नेपच्यून मार्गी होता है। 18 दिसंबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका नौवाँ भाव। 20 दिसंबर को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका दसवाँ भाव। 22 दिसंबर को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका नौवाँ भाव। 24 दिसंबर को शनि मार्गी होता है। 28 दिसंबर को अमावस्या — नौवाँ भाव (लंबी यात्राएँ और पढ़ाई)।

महीने के अच्छे दिन: 2, 13, 17।

यह राशिफल कैसे बनाया गया है

2027 का राशिफल धीमे ग्रहों पर आधारित है: वृषभ के लिए बृहस्पति और शनि कहाँ स्थित हैं, यूरेनस, नेपच्यून और प्लूटो किन भावों से गुज़रते हैं, ग्रहण किन भावों में पड़ते हैं और ग्रह कब वक्री होते हैं। यही वर्ष के मुख्य विषय हैं — इन्हें न दिन बदलते हैं, न सप्ताह।

महीनेवार विश्लेषण और प्रेम, काम, धन और ऊर्जा के लिए सबसे अच्छे महीने — महीने के सभी दिनों के अंकों का योग: चंद्रमा का भाव, शुक्र, मंगल, बृहस्पति और शनि की स्थितियाँ, वक्री अवधियाँ, पहलू, अमावस्या-पूर्णिमा और ग्रहण। सभी तिथियाँ JPL DE421 एफ़ेमेरिस के अनुसार हैं, भाव — सौर: वृषभ — पहला भाव।

वृषभ का स्वामी ग्रह

राशि का स्वामी ग्रह — शुक्र। परंपरा के अनुसार वृषभ के लिए इसकी स्थिति और पहलू अन्य राशियों की तुलना में अधिक मायने रखते हैं: स्वामी ग्रह के शुभ पहलू पूरी अवधि को मज़बूत करते हैं, तनावपूर्ण पहलू उसे कठिन बनाते हैं।

वृषभ राशिफल — अन्य अवधियों के लिए

यह पाठ सभी वृषभ राशि वालों के लिए एक जैसा है — राशि के अनुसार राशिफल ऐसे ही बनता है, और इसकी भविष्यवाणी की शक्ति सिद्ध नहीं है। व्यक्तिगत तस्वीर जन्म कुंडली पर गोचर और वर्षफल में दिखती है, और राशि का स्वभाव — वृषभ पेज पर।

दूसरी राशियों का 2027 का राशिफल