कुंभ राशिफल 2027
कुंभ (20 जनवरी — 18 फ़रवरी) के लिए 2027 का राशिफल: बृहस्पति और शनि के अनुसार वर्ष के मुख्य विषय, ग्रहण और वक्री ग्रह, प्रेम, काम और धन के लिए सबसे अच्छे महीने और हर महीने का विस्तृत विश्लेषण।
साल संक्षेप में
26 जुलाई तक। बृहस्पति सातवें भाव में: गठबंधनों का वर्ष — परंपरा के अनुसार विवाह, साझेदारी और लाभदायक अनुबंधों के लिए अनुकूल।
26 जुलाई से। बृहस्पति आठवें भाव में: साझा धन — लोन, विरासत, साथी की आमदनी — और गहरे बदलावों का वर्ष।
बृहस्पति इस समय वक्री है — ऐसा साल में लगभग चार महीने होता है। परंपरा के अनुसार विकास भीतर की ओर होता है: योजनाओं पर पुनर्विचार का समय, विस्तार का नहीं।
शनि तीसरे भाव में: गंभीर पढ़ाई, कठिन बातचीत, रिश्तेदारों और पड़ोसियों के प्रति ज़िम्मेदारियाँ।
शनि इस समय वक्री है — साल में लगभग साढ़े चार महीने। परंपरा के अनुसार — अधूरी ज़िम्मेदारियों पर लौटने का समय।
परंपरा के अनुसार अवधि का स्वर हल्का है: सामंजस्यपूर्ण पहलू (94) तनावपूर्ण पहलुओं (75) से साफ़ तौर पर ज़्यादा हैं। काम आगे बढ़ाने और जो चाहिए वह माँगने का अच्छा समय।
ग्रहों की स्थितियाँ, पहलू और ग्रहण — JPL DE421 एफ़ेमेरिस के अनुसार। भाव राशि से गिने जाते हैं: राशि स्वयं पहला भाव है, अगली दूसरा, और इसी तरह आगे। अच्छे और कठिन दिन परंपरा के नियमों से चुने गए हैं: चंद्रमा का भाव, ग्रहों की स्थितियाँ, दिन के पहलू, अमावस्या, पूर्णिमा और ग्रहण।
साल की घटनाएँ
ग्रहण
6 फ़रवरी — अमावस्या — कुंभ में, पहला भाव। वलयाकार सूर्य ग्रहण। आपकी राशि में अमावस्या एक छोटा-सा निजी नया साल है। परंपरा के अनुसार यह महीने का सबसे अच्छा समय है अपने लिए कुछ शुरू करने का: नई दिनचर्या, नया रूप, खेल, ऐसी परियोजना जिसकी बागडोर आपके हाथ में हो। परंपरा के अनुसार ग्रहण सामान्य अमावस्या या पूर्णिमा से ज़्यादा और कई महीनों तक असर करता है: इस क्षेत्र की घटनाएँ अचानक आती हैं, और सलाह दी जाती है कि अहम शुरुआतें उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले-बाद न रखें।
21 फ़रवरी — पूर्णिमा — कन्या में, आठवाँ भाव। उपच्छाया चंद्र ग्रहण। आठवें भाव में पूर्णिमा साझा धन और गहरी भावनाओं के प्रश्न सुलझाती है। परंपरा के अनुसार क़र्ज़ चुकाने और जो रोक रहा है उसे छोड़ने का समय। परंपरा के अनुसार ग्रहण सामान्य अमावस्या या पूर्णिमा से ज़्यादा और कई महीनों तक असर करता है: इस क्षेत्र की घटनाएँ अचानक आती हैं, और सलाह दी जाती है कि अहम शुरुआतें उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले-बाद न रखें।
18 जुलाई — पूर्णिमा — मकर में, बारहवाँ भाव। उपच्छाया चंद्र ग्रहण। बारहवें भाव में पूर्णिमा परंपरा के अनुसार महीने के सबसे थकाने वाले दिनों में से एक है: छिपी बातें सामने आती हैं और शांति की चाह होती है। पूरा करने, आराम करने और कुछ अहम शुरू न करने का समय। परंपरा के अनुसार ग्रहण सामान्य अमावस्या या पूर्णिमा से ज़्यादा और कई महीनों तक असर करता है: इस क्षेत्र की घटनाएँ अचानक आती हैं, और सलाह दी जाती है कि अहम शुरुआतें उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले-बाद न रखें।
2 अगस्त — अमावस्या — सिंह में, सातवाँ भाव। पूर्ण सूर्य ग्रहण। सातवें भाव में अमावस्या नए गठबंधनों का समय है। परंपरा के अनुसार यह मेल-मिलाप, सुलह, अनुबंध पर हस्ताक्षर और साझा काम शुरू करने के लिए अनुकूल है। परंपरा के अनुसार ग्रहण सामान्य अमावस्या या पूर्णिमा से ज़्यादा और कई महीनों तक असर करता है: इस क्षेत्र की घटनाएँ अचानक आती हैं, और सलाह दी जाती है कि अहम शुरुआतें उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले-बाद न रखें।
17 अगस्त — पूर्णिमा — कुंभ में, पहला भाव। उपच्छाया चंद्र ग्रहण। आपकी राशि में पूर्णिमा निजी शक्ति और भावनाओं का शिखर है। परंपरा के अनुसार दिखता है कि पिछले महीनों की मेहनत कहाँ तक पहुँची; रिश्तों (सामने का सातवाँ भाव) में संतुलन चाहिए — सब कुछ अपनी ओर न खींचें। परंपरा के अनुसार ग्रहण सामान्य अमावस्या या पूर्णिमा से ज़्यादा और कई महीनों तक असर करता है: इस क्षेत्र की घटनाएँ अचानक आती हैं, और सलाह दी जाती है कि अहम शुरुआतें उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले-बाद न रखें।
वक्री अवधियाँ
- बुध: 9 फ़रवरी – 3 मार्च, मीन में, दूसरा भाव → कुंभ में, पहला भाव
- बुध: 10 जून – 5 जुलाई, कर्क में, छठा भाव → मिथुन में, पाँचवाँ भाव
- बुध: 7 अक्टूबर – 28 अक्टूबर, वृश्चिक में, दसवाँ भाव → तुला में, नौवाँ भाव
- मंगल: 10 जनवरी – 1 अप्रैल, कन्या में, आठवाँ भाव → सिंह में, सातवाँ भाव
- बृहस्पति: साल की शुरुआत – 13 अप्रैल, सिंह में, सातवाँ भाव
- शनि: 9 अगस्त – 24 दिसंबर, मेष में, तीसरा भाव
परंपरा के अनुसार वक्री ग्रह अपने विषयों में कमज़ोर होता है: बुध — अनुबंध, तकनीक, यात्राएँ; शुक्र — प्रेम और बड़ी ख़रीदारी; मंगल — नई शुरुआतें और विवाद; बृहस्पति और शनि — दीर्घकालिक योजनाएँ। इन क्षेत्रों में नया काम इन अवधियों के बाहर शुरू करना बेहतर है।
बृहस्पति और शनि राशि बदलते हैं
26 जुलाई — बृहस्पति राशि बदलता है: अब कन्या में, आठवाँ भाव। बृहस्पति आठवें भाव में: साझा धन — लोन, विरासत, साथी की आमदनी — और गहरे बदलावों का वर्ष।
प्रेम और रिश्ते
शुक्र, 1 मार्च – 26 मार्च: कुंभ में, पहला भाव। आपकी राशि में शुक्र परंपरा के अनुसार प्रेम के लिए साल का सबसे अच्छा समय है: आप आकर्षक हैं और ध्यान अपने आप मिलता है। जान-पहचान बढ़ाने और अलमारी व छवि को नया रूप देने के लिए अच्छा।
शुक्र, 8 जून – 3 जुलाई: मिथुन में, पाँचवाँ भाव। पाँचवें भाव में शुक्र परंपरा के अनुसार रोमांस की सबसे अच्छी स्थिति है: मुलाक़ातें, प्यार में पड़ना, आनंद, उपहार। अगर आप अकेले हैं, तो यह किसी से मिलने का समय है।
शुक्र, 27 जुलाई – 21 अगस्त: सिंह में, सातवाँ भाव। सातवें भाव में शुक्र परंपरा के अनुसार मिलन का समय है: जोड़े में सामंजस्य, सुलह, सगाई या विवाह के लिए अच्छा समय। अकेले लोग दूसरों के ज़रिए किसी से मिलते हैं।
शुक्र, 20 दिसंबर – साल का अंत: कुंभ में, पहला भाव। आपकी राशि में शुक्र परंपरा के अनुसार प्रेम के लिए साल का सबसे अच्छा समय है: आप आकर्षक हैं और ध्यान अपने आप मिलता है। जान-पहचान बढ़ाने और अलमारी व छवि को नया रूप देने के लिए अच्छा।
मंगल, साल की शुरुआत – 21 फ़रवरी: कन्या में, आठवाँ भाव। आठवें भाव में मंगल: तीव्र जुनून और नियंत्रण की खींचतान। परंपरा के अनुसार दबाव न डालना और ईर्ष्या न करना ज़रूरी है; अंतरंगता सामने आती है।
मंगल, 21 फ़रवरी – 14 मई: सिंह में, सातवाँ भाव। सातवें भाव में मंगल परंपरा के अनुसार जोड़े में खुले टकराव का समय है: जो जमा हुआ है वह बाहर आता है। बहस ठीक है, जंग नहीं; जुनून भी प्रबल है।
मंगल, 14 मई – 15 जुलाई: कन्या में, आठवाँ भाव। आठवें भाव में मंगल: तीव्र जुनून और नियंत्रण की खींचतान। परंपरा के अनुसार दबाव न डालना और ईर्ष्या न करना ज़रूरी है; अंतरंगता सामने आती है।
बृहस्पति, साल की शुरुआत – 26 जुलाई: सिंह में, सातवाँ भाव। बृहस्पति सातवें भाव में: गठबंधनों का वर्ष — परंपरा के अनुसार विवाह, साझेदारी और लाभदायक अनुबंधों के लिए अनुकूल।
कुल अंकों के अनुसार सबसे अच्छे महीने: जून, जुलाई, अगस्त।
काम और करियर
तीसरे भाव में शनि: गंभीर पढ़ाई और काग़ज़ी काम; दस्तावेज़ और अनुबंध सटीकता माँगते हैं। परंपरा के अनुसार योग्यता बढ़ाने का अच्छा समय।
मंगल, 2 सितंबर – 16 अक्टूबर: वृश्चिक में, दसवाँ भाव। दसवें भाव में मंगल परंपरा के अनुसार उसकी सबसे मज़बूत स्थितियों में से एक है: करियर में सफलता, महत्वाकांक्षा, नतीजे। वरिष्ठों से टकराव संभव — अपनी लड़ाइयाँ सोच-समझकर चुनें।
इस साल बुध की वक्री अवधियाँ: 3 (तारीख़ें ऊपर «वक्री अवधियाँ» में हैं)। इन हफ़्तों में परंपरा के अनुसार अनुबंध, तकनीक और यात्राएँ दोहरी जाँच माँगती हैं।
कुल अंकों के अनुसार सबसे अच्छे महीने: जुलाई, अक्टूबर, नवंबर।
धन
26 जुलाई तक। सातवें भाव में बृहस्पति: लाभदायक अनुबंध और साझेदार। परंपरा के अनुसार पैसा गठबंधनों, अनुबंधों, जीवनसाथी या ग्राहकों के ज़रिए आता है।
26 जुलाई से। आठवें भाव में बृहस्पति: परंपरा के अनुसार दूसरों के पैसे में भाग्य — अच्छी शर्तों पर क़र्ज़, विरासत, साथी की आय, बीमा भुगतान।
शुक्र, 7 जनवरी – 3 फ़रवरी: धनु में, ग्यारहवाँ भाव। ग्यारहवें भाव में शुक्र: दोस्तों और संपर्कों के ज़रिए पैसा, उपहार, छोटी वित्तीय इच्छाओं का पूरा होना।
शुक्र, 26 मार्च – 20 अप्रैल: मीन में, दूसरा भाव। दूसरे भाव में शुक्र परंपरा के अनुसार धन के लिए उसकी सबसे अच्छी स्थितियों में से एक है: आय आसानी से आती है, सुंदर और गुणवत्तापूर्ण चीज़ों की ख़रीद सफल रहती है।
शुक्र, 21 अगस्त – 14 सितंबर: कन्या में, आठवाँ भाव। आठवें भाव में शुक्र: उपहार, साथी का पैसा, सफल क़र्ज़। परंपरा के अनुसार साझा वित्त पर बातचीत का अच्छा समय।
शुक्र, 1 नवंबर – 25 नवंबर: धनु में, ग्यारहवाँ भाव। ग्यारहवें भाव में शुक्र: दोस्तों और संपर्कों के ज़रिए पैसा, उपहार, छोटी वित्तीय इच्छाओं का पूरा होना।
कुल अंकों के अनुसार सबसे अच्छे महीने: अगस्त, सितंबर, नवंबर।
सेहत और ऊर्जा
मंगल, 26 नवंबर – साल का अंत: मकर में, बारहवाँ भाव। बारहवें भाव में मंगल परंपरा के अनुसार छिपी थकान है: ऊर्जा चुपचाप निकल जाती है, अनिद्रा और बिना साफ़ कारण की अस्वस्थता संभव। ज़्यादा नींद, कम बोझ।
तीसरे भाव में शनि: परंपरा के अनुसार नसों, साँस और कंधों का ध्यान रखें; कम भागदौड़, ज़्यादा टहलना।
मंगल इस समय वक्री है। परंपरा के अनुसार काम अटकते हैं और पुराने टकराव लौट आते हैं — ऊर्जा उन कामों में लगाना बेहतर है, जो पहले से शुरू हो चुके हैं।
ये सेहत के बारे में ज्योतिषीय सुझाव हैं, चिकित्सा सलाह नहीं: तबीयत ठीक न लगे तो डॉक्टर से मिलें।
कुल अंकों के अनुसार सबसे अच्छे महीने: मार्च, जुलाई, दिसंबर।
यूरेनस, नेपच्यून और प्लूटो
पाँचवें भाव में यूरेनस: अप्रत्याशित रोमांस और शौक़, लीक से हटकर रिश्ते। परंपरा के अनुसार प्रेम अचानक भड़कता है — और उतनी ही अचानक चला जाता है।
तीसरे भाव में नेपच्यून: कल्पना, अंतर्ज्ञान, रचनात्मक लेखन — पर शब्दों और दस्तावेज़ों में उलझन भी। परंपरा के अनुसार अनुबंध दोबारा पढ़ें।
आपकी राशि में प्लूटो: परंपरा के अनुसार व्यक्तित्व का गहरा पुनर्निर्माण — इस दौर से लोग बदलकर निकलते हैं। ताक़त संकटों से होकर बढ़ती है।
महीना-दर-महीना
जनवरी संतुलित महीना
सूर्य — आपका बारहवाँ भाव: विश्राम और एकांत। 7 जनवरी को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका ग्यारहवाँ भाव। 8 जनवरी को अमावस्या — बारहवाँ भाव (विश्राम और एकांत)। 10 जनवरी को मंगल वक्री होता है। 13 जनवरी को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका पहला भाव। 20 जनवरी को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका पहला भाव। 22 जनवरी को पूर्णिमा — सातवाँ भाव (साझेदार और अनुबंध)।
महीने के अच्छे दिन: 22, 24, 29।
फ़रवरी तनावपूर्ण महीना
सूर्य — आपका पहला भाव: व्यक्तित्व और सेहत। 1 फ़रवरी को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका दूसरा भाव। 3 फ़रवरी को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका बारहवाँ भाव। 6 फ़रवरी को वलयाकार सूर्य ग्रहण — पहला भाव (व्यक्तित्व और सेहत)। 8 फ़रवरी को यूरेनस मार्गी होता है। 9 फ़रवरी को बुध वक्री होता है। 18 फ़रवरी को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका पहला भाव। 19 फ़रवरी को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका दूसरा भाव। 21 फ़रवरी को उपच्छाया चंद्र ग्रहण — आठवाँ भाव (साझा धन और बदलाव)। 21 फ़रवरी को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका सातवाँ भाव।
महीने के अच्छे दिन: 1, 2, 8।
मार्च तनावपूर्ण महीना
सूर्य — आपका दूसरा भाव: धन और संपत्ति। 1 मार्च को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका पहला भाव। 3 मार्च को बुध मार्गी होता है। 8 मार्च को अमावस्या — दूसरा भाव (धन और संपत्ति)। 18 मार्च को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका दूसरा भाव। 21 मार्च को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका तीसरा भाव। 22 मार्च को पूर्णिमा — नौवाँ भाव (लंबी यात्राएँ और पढ़ाई)। 26 मार्च को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका दूसरा भाव।
महीने के अच्छे दिन: 6, 13, 27।
अप्रैल संतुलित महीना
सूर्य — आपका तीसरा भाव: संवाद और यात्राएँ। 1 अप्रैल को मंगल मार्गी होता है। 7 अप्रैल को अमावस्या — तीसरा भाव (संवाद और यात्राएँ)। 9 अप्रैल को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका तीसरा भाव। 13 अप्रैल को बृहस्पति मार्गी होता है। 20 अप्रैल को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका तीसरा भाव। 20 अप्रैल को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका चौथा भाव। 21 अप्रैल को पूर्णिमा — दसवाँ भाव (करियर और प्रतिष्ठा)। 25 अप्रैल को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका चौथा भाव।
महीने के अच्छे दिन: 2, 3, 11।
मई तनावपूर्ण महीना
सूर्य — आपका चौथा भाव: घर और परिवार। 6 मई को अमावस्या — चौथा भाव (घर और परिवार)। 8 मई को प्लूटो वक्री होता है। 9 मई को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका पाँचवाँ भाव। 14 मई को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका आठवाँ भाव। 15 मई को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका चौथा भाव। 20 मई को पूर्णिमा — दसवाँ भाव (करियर और प्रतिष्ठा)। 21 मई को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका पाँचवाँ भाव। 28 मई को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका छठा भाव।
महीने के अच्छे दिन: 12, 22, 27।
जून संतुलित महीना
सूर्य — आपका पाँचवाँ भाव: प्रेम, संतान, रचनात्मकता। 5 जून को अमावस्या — पाँचवाँ भाव (प्रेम, संतान, रचनात्मकता)। 8 जून को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका पाँचवाँ भाव। 10 जून को बुध वक्री होता है। 19 जून को पूर्णिमा — ग्यारहवाँ भाव (मित्र और योजनाएँ)। 21 जून को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका छठा भाव। 26 जून को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका पाँचवाँ भाव।
महीने के अच्छे दिन: 13, 14, 17।
जुलाई अच्छा महीना
सूर्य — आपका छठा भाव: काम और स्वास्थ्य। 3 जुलाई को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका छठा भाव। 4 जुलाई को अमावस्या — छठा भाव (काम और स्वास्थ्य)। 5 जुलाई को बुध मार्गी होता है। 10 जुलाई को नेपच्यून वक्री होता है। 12 जुलाई को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका छठा भाव। 15 जुलाई को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका नौवाँ भाव। 18 जुलाई को उपच्छाया चंद्र ग्रहण — बारहवाँ भाव (विश्राम और एकांत)। 23 जुलाई को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका सातवाँ भाव। 26 जुलाई को बृहस्पति आगे बढ़ता है: अब आपका आठवाँ भाव। 27 जुलाई को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका सातवाँ भाव।
महीने के अच्छे दिन: 12, 15, 30।
अगस्त अच्छा महीना
सूर्य — आपका सातवाँ भाव: साझेदार और अनुबंध। 2 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण — सातवाँ भाव (साझेदार और अनुबंध)। 2 अगस्त को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका सातवाँ भाव। 9 अगस्त को शनि वक्री होता है। 17 अगस्त को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका आठवाँ भाव। 17 अगस्त को उपच्छाया चंद्र ग्रहण — पहला भाव (व्यक्तित्व और सेहत)। 21 अगस्त को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका आठवाँ भाव। 23 अगस्त को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका आठवाँ भाव। 31 अगस्त को अमावस्या — आठवाँ भाव (साझा धन और बदलाव)।
महीने के अच्छे दिन: 11, 12, 26।
सितंबर संतुलित महीना
सूर्य — आपका आठवाँ भाव: साझा धन और बदलाव। 2 सितंबर को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका दसवाँ भाव। 3 सितंबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका नौवाँ भाव। 14 सितंबर को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका नौवाँ भाव। 15 सितंबर को यूरेनस वक्री होता है। 16 सितंबर को पूर्णिमा — दूसरा भाव (धन और संपत्ति)। 23 सितंबर को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका नौवाँ भाव। 27 सितंबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका दसवाँ भाव। 30 सितंबर को अमावस्या — नौवाँ भाव (लंबी यात्राएँ और पढ़ाई)।
महीने के अच्छे दिन: 7, 8, 20।
अक्टूबर संतुलित महीना
सूर्य — आपका नौवाँ भाव: लंबी यात्राएँ और पढ़ाई। 7 अक्टूबर को बुध वक्री होता है। 8 अक्टूबर को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका दसवाँ भाव। 15 अक्टूबर को पूर्णिमा — तीसरा भाव (संवाद और यात्राएँ)। 16 अक्टूबर को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका ग्यारहवाँ भाव। 16 अक्टूबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका नौवाँ भाव। 18 अक्टूबर को प्लूटो मार्गी होता है। 23 अक्टूबर को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका दसवाँ भाव। 28 अक्टूबर को बुध मार्गी होता है। 29 अक्टूबर को अमावस्या — दसवाँ भाव (करियर और प्रतिष्ठा)।
महीने के अच्छे दिन: 11, 22, 23।
नवंबर अच्छा महीना
सूर्य — आपका दसवाँ भाव: करियर और प्रतिष्ठा। 1 नवंबर को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका ग्यारहवाँ भाव। 10 नवंबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका दसवाँ भाव। 14 नवंबर को पूर्णिमा — चौथा भाव (घर और परिवार)। 22 नवंबर को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका ग्यारहवाँ भाव। 25 नवंबर को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका बारहवाँ भाव। 26 नवंबर को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका बारहवाँ भाव। 28 नवंबर को अमावस्या — ग्यारहवाँ भाव (मित्र और योजनाएँ)। 29 नवंबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका ग्यारहवाँ भाव।
महीने के अच्छे दिन: 5, 15, 19।
दिसंबर संतुलित महीना
सूर्य — आपका ग्यारहवाँ भाव: मित्र और योजनाएँ। 13 दिसंबर को पूर्णिमा — पाँचवाँ भाव (प्रेम, संतान, रचनात्मकता)। 15 दिसंबर को नेपच्यून मार्गी होता है। 18 दिसंबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका बारहवाँ भाव। 20 दिसंबर को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका पहला भाव। 22 दिसंबर को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका बारहवाँ भाव। 24 दिसंबर को शनि मार्गी होता है। 28 दिसंबर को अमावस्या — बारहवाँ भाव (विश्राम और एकांत)।
महीने के अच्छे दिन: 13, 17, 25।
यह राशिफल कैसे बनाया गया है
2027 का राशिफल धीमे ग्रहों पर आधारित है: कुंभ के लिए बृहस्पति और शनि कहाँ स्थित हैं, यूरेनस, नेपच्यून और प्लूटो किन भावों से गुज़रते हैं, ग्रहण किन भावों में पड़ते हैं और ग्रह कब वक्री होते हैं। यही वर्ष के मुख्य विषय हैं — इन्हें न दिन बदलते हैं, न सप्ताह।
महीनेवार विश्लेषण और प्रेम, काम, धन और ऊर्जा के लिए सबसे अच्छे महीने — महीने के सभी दिनों के अंकों का योग: चंद्रमा का भाव, शुक्र, मंगल, बृहस्पति और शनि की स्थितियाँ, वक्री अवधियाँ, पहलू, अमावस्या-पूर्णिमा और ग्रहण। सभी तिथियाँ JPL DE421 एफ़ेमेरिस के अनुसार हैं, भाव — सौर: कुंभ — पहला भाव।
कुंभ का स्वामी ग्रह
राशि का स्वामी ग्रह — शनि। परंपरा के अनुसार कुंभ के लिए इसकी स्थिति और पहलू अन्य राशियों की तुलना में अधिक मायने रखते हैं: स्वामी ग्रह के शुभ पहलू पूरी अवधि को मज़बूत करते हैं, तनावपूर्ण पहलू उसे कठिन बनाते हैं।
कुंभ राशिफल — अन्य अवधियों के लिए
यह पाठ सभी कुंभ राशि वालों के लिए एक जैसा है — राशि के अनुसार राशिफल ऐसे ही बनता है, और इसकी भविष्यवाणी की शक्ति सिद्ध नहीं है। व्यक्तिगत तस्वीर जन्म कुंडली पर गोचर और वर्षफल में दिखती है, और राशि का स्वभाव — कुंभ पेज पर।