मिथुन राशिफल 2027
मिथुन (21 मई — 20 जून) का 2027 का राशिफल: बृहस्पति और शनि के अनुसार वर्ष के मुख्य विषय, ग्रहण और वक्री ग्रह, प्रेम, काम और धन के लिए सबसे अच्छे महीने और हर महीने का विस्तृत विश्लेषण।
साल संक्षेप में
26 जुलाई तक। बृहस्पति तीसरे भाव में: पढ़ाई, यात्राओं, आस-पास नई जान-पहचान और सफल वार्ताओं का वर्ष।
26 जुलाई से। बृहस्पति चौथे भाव में: घर और परिवार का वर्ष — परंपरा घर बदलने, घर के विस्तार और परिवार में नए सदस्य के आगमन को इसके विषय मानती है।
बृहस्पति इस समय वक्री है — ऐसा साल में लगभग चार महीने होता है। परंपरा के अनुसार विकास भीतर की ओर होता है: योजनाओं पर पुनर्विचार का समय, विस्तार का नहीं।
शनि ग्यारहवें भाव में: दोस्तों का दायरा भरोसेमंद लोगों तक सिमट जाता है, योजनाएँ ज़्यादा व्यावहारिक बनती हैं।
शनि इस समय वक्री है — साल में लगभग साढ़े चार महीने। परंपरा के अनुसार — अधूरी ज़िम्मेदारियों पर लौटने का समय।
परंपरा के अनुसार अवधि का स्वर हल्का है: सामंजस्यपूर्ण पहलू (94) तनावपूर्ण पहलुओं (75) से साफ़ तौर पर ज़्यादा हैं। काम आगे बढ़ाने और जो चाहिए वह माँगने का अच्छा समय।
ग्रहों की स्थितियाँ, पहलू और ग्रहण — JPL DE421 एफ़ेमेरिस के अनुसार। भाव राशि से गिने जाते हैं: राशि स्वयं पहला भाव है, अगली दूसरा, और इसी तरह आगे। अच्छे और कठिन दिन परंपरा के नियमों से चुने गए हैं: चंद्रमा का भाव, ग्रहों की स्थितियाँ, दिन के पहलू, अमावस्या, पूर्णिमा और ग्रहण।
साल की घटनाएँ
ग्रहण
6 फ़रवरी — अमावस्या — कुंभ में, नौवाँ भाव। वलयाकार सूर्य ग्रहण। नौवें भाव में अमावस्या बड़ी योजनाओं की शुरुआत है। परंपरा के अनुसार यात्रा की योजना, पढ़ाई के लिए आवेदन, कोर्स की शुरुआत, लेखन और प्रकाशन, विदेश और क़ानून से जुड़े कामों के लिए अनुकूल। परंपरा के अनुसार ग्रहण सामान्य अमावस्या या पूर्णिमा से ज़्यादा और कई महीनों तक असर करता है: इस क्षेत्र की घटनाएँ अचानक आती हैं, और सलाह दी जाती है कि अहम शुरुआतें उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले-बाद न रखें।
21 फ़रवरी — पूर्णिमा — कन्या में, चौथा भाव। उपच्छाया चंद्र ग्रहण। चौथे भाव में पूर्णिमा पारिवारिक मामलों का शिखर है: घर और करियर अलग-अलग दिशाओं में खींचते हैं। परंपरा के अनुसार घर के काम पूरे करने और परिवार के साथ रहने का समय। परंपरा के अनुसार ग्रहण सामान्य अमावस्या या पूर्णिमा से ज़्यादा और कई महीनों तक असर करता है: इस क्षेत्र की घटनाएँ अचानक आती हैं, और सलाह दी जाती है कि अहम शुरुआतें उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले-बाद न रखें।
18 जुलाई — पूर्णिमा — मकर में, आठवाँ भाव। उपच्छाया चंद्र ग्रहण। आठवें भाव में पूर्णिमा साझा धन और गहरी भावनाओं के प्रश्न सुलझाती है। परंपरा के अनुसार क़र्ज़ चुकाने और जो रोक रहा है उसे छोड़ने का समय। परंपरा के अनुसार ग्रहण सामान्य अमावस्या या पूर्णिमा से ज़्यादा और कई महीनों तक असर करता है: इस क्षेत्र की घटनाएँ अचानक आती हैं, और सलाह दी जाती है कि अहम शुरुआतें उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले-बाद न रखें।
2 अगस्त — अमावस्या — सिंह में, तीसरा भाव। पूर्ण सूर्य ग्रहण। तीसरे भाव में अमावस्या पढ़ाई, पत्राचार और बातचीत की शुरुआत है। परंपरा के अनुसार किसी कोर्स में दाख़िला लेने, अहम बातचीत शुरू करने, गाड़ी या यात्रा का इंतज़ाम करने और भाई-बहनों व पड़ोसियों से फिर जुड़ने का अच्छा समय। परंपरा के अनुसार ग्रहण सामान्य अमावस्या या पूर्णिमा से ज़्यादा और कई महीनों तक असर करता है: इस क्षेत्र की घटनाएँ अचानक आती हैं, और सलाह दी जाती है कि अहम शुरुआतें उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले-बाद न रखें।
17 अगस्त — पूर्णिमा — कुंभ में, नौवाँ भाव। उपच्छाया चंद्र ग्रहण। नौवें भाव में पूर्णिमा पढ़ाई, यात्रा और क़ानूनी मामलों में नतीजे लाती है: परीक्षा परिणाम और फ़ैसले आते हैं। परंपरा के अनुसार शुरू करने से ज़्यादा पूरा करने का अच्छा समय। परंपरा के अनुसार ग्रहण सामान्य अमावस्या या पूर्णिमा से ज़्यादा और कई महीनों तक असर करता है: इस क्षेत्र की घटनाएँ अचानक आती हैं, और सलाह दी जाती है कि अहम शुरुआतें उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले-बाद न रखें।
वक्री अवधियाँ
- बुध: 9 फ़रवरी – 3 मार्च, मीन में, दसवाँ भाव → कुंभ में, नौवाँ भाव
- बुध: 10 जून – 5 जुलाई, कर्क में, दूसरा भाव → मिथुन में, पहला भाव
- बुध: 7 अक्टूबर – 28 अक्टूबर, वृश्चिक में, छठा भाव → तुला में, पाँचवाँ भाव
- मंगल: 10 जनवरी – 1 अप्रैल, कन्या में, चौथा भाव → सिंह में, तीसरा भाव
- बृहस्पति: साल की शुरुआत – 13 अप्रैल, सिंह में, तीसरा भाव
- शनि: 9 अगस्त – 24 दिसंबर, मेष में, ग्यारहवाँ भाव
परंपरा के अनुसार वक्री ग्रह अपने विषयों में कमज़ोर होता है: बुध — अनुबंध, तकनीक, यात्राएँ; शुक्र — प्रेम और बड़ी ख़रीदारी; मंगल — नई शुरुआतें और विवाद; बृहस्पति और शनि — दीर्घकालिक योजनाएँ। इन क्षेत्रों में नया काम इन अवधियों के बाहर शुरू करना बेहतर है।
बृहस्पति और शनि राशि बदलते हैं
26 जुलाई — बृहस्पति राशि बदलता है: अब कन्या में, चौथा भाव। बृहस्पति चौथे भाव में: घर और परिवार का वर्ष — परंपरा घर बदलने, घर के विस्तार और परिवार में नए सदस्य के आगमन को इसके विषय मानती है।
प्रेम और रिश्ते
शुक्र, 7 जनवरी – 3 फ़रवरी: धनु में, सातवाँ भाव। सातवें भाव में शुक्र परंपरा के अनुसार मिलन का समय है: जोड़े में सामंजस्य, सुलह, सगाई या विवाह के लिए अच्छा समय। अकेले लोग दूसरों के ज़रिए किसी से मिलते हैं।
शुक्र, 8 जून – 3 जुलाई: मिथुन में, पहला भाव। आपकी राशि में शुक्र परंपरा के अनुसार प्रेम के लिए साल का सबसे अच्छा समय है: आप आकर्षक हैं और ध्यान अपने आप मिलता है। जान-पहचान बढ़ाने और अलमारी व छवि को नया रूप देने के लिए अच्छा।
शुक्र, 14 सितंबर – 8 अक्टूबर: तुला में, पाँचवाँ भाव। पाँचवें भाव में शुक्र परंपरा के अनुसार रोमांस की सबसे अच्छी स्थिति है: मुलाक़ातें, प्यार में पड़ना, आनंद, उपहार। अगर आप अकेले हैं, तो यह किसी से मिलने का समय है।
शुक्र, 1 नवंबर – 25 नवंबर: धनु में, सातवाँ भाव। सातवें भाव में शुक्र परंपरा के अनुसार मिलन का समय है: जोड़े में सामंजस्य, सुलह, सगाई या विवाह के लिए अच्छा समय। अकेले लोग दूसरों के ज़रिए किसी से मिलते हैं।
मंगल, 15 जुलाई – 2 सितंबर: तुला में, पाँचवाँ भाव। पाँचवें भाव में मंगल परंपरा के अनुसार जुनून का समय है: तीव्र आकर्षण, प्रेम-निवेदन का रोमांच, जीवंत मुलाक़ातें। जोखिम — ईर्ष्या और आवेगी कदम।
मंगल, 16 अक्टूबर – 26 नवंबर: धनु में, सातवाँ भाव। सातवें भाव में मंगल परंपरा के अनुसार जोड़े में खुले टकराव का समय है: जो जमा हुआ है वह बाहर आता है। बहस ठीक है, जंग नहीं; जुनून भी प्रबल है।
मंगल, 26 नवंबर – साल का अंत: मकर में, आठवाँ भाव। आठवें भाव में मंगल: तीव्र जुनून और नियंत्रण की खींचतान। परंपरा के अनुसार दबाव न डालना और ईर्ष्या न करना ज़रूरी है; अंतरंगता सामने आती है।
कुल अंकों के अनुसार सबसे अच्छे महीने: जनवरी, सितंबर, नवंबर।
काम और करियर
ग्यारहवें भाव में शनि: पेशेवर संपर्क सिमटकर भरोसेमंद लोगों तक रह जाते हैं। परंपरा के अनुसार यथार्थवादी योजनाओं और लंबी साझा परियोजनाओं का समय।
मंगल, 2 सितंबर – 16 अक्टूबर: वृश्चिक में, छठा भाव। छठे भाव में मंगल परंपरा के अनुसार काम के लिए मज़बूत स्थिति है: बहुत काम और बहुत कुछ पूरा। पर सहकर्मियों से घर्षण और ज़रूरत से ज़्यादा काम अक्सर साथ चलते हैं।
इस साल बुध की वक्री अवधियाँ: 3 (तारीख़ें ऊपर «वक्री अवधियाँ» में हैं)। इन हफ़्तों में परंपरा के अनुसार अनुबंध, तकनीक और यात्राएँ दोहरी जाँच माँगती हैं।
कुल अंकों के अनुसार सबसे अच्छे महीने: अप्रैल, अक्टूबर, नवंबर।
धन
26 जुलाई तक। तीसरे भाव में बृहस्पति: संवाद, बिक्री, पढ़ाने और यात्राओं से पैसा। परंपरा के अनुसार क़रीबी लोगों के साथ सौदे सफल होते हैं।
26 जुलाई से। चौथे भाव में बृहस्पति: संपत्ति में भाग्य — ख़रीद, घर का विस्तार, परिवार से मदद। परंपरा के अनुसार पैसा घर की ओर बहता है।
शुक्र, 3 फ़रवरी – 1 मार्च: मकर में, आठवाँ भाव। आठवें भाव में शुक्र: उपहार, साथी का पैसा, सफल क़र्ज़। परंपरा के अनुसार साझा वित्त पर बातचीत का अच्छा समय।
शुक्र, 20 अप्रैल – 15 मई: मेष में, ग्यारहवाँ भाव। ग्यारहवें भाव में शुक्र: दोस्तों और संपर्कों के ज़रिए पैसा, उपहार, छोटी वित्तीय इच्छाओं का पूरा होना।
शुक्र, 3 जुलाई – 27 जुलाई: कर्क में, दूसरा भाव। दूसरे भाव में शुक्र परंपरा के अनुसार धन के लिए उसकी सबसे अच्छी स्थितियों में से एक है: आय आसानी से आती है, सुंदर और गुणवत्तापूर्ण चीज़ों की ख़रीद सफल रहती है।
शुक्र, 25 नवंबर – 20 दिसंबर: मकर में, आठवाँ भाव। आठवें भाव में शुक्र: उपहार, साथी का पैसा, सफल क़र्ज़। परंपरा के अनुसार साझा वित्त पर बातचीत का अच्छा समय।
कुल अंकों के अनुसार सबसे अच्छे महीने: जनवरी, अप्रैल, जुलाई।
सेहत और ऊर्जा
मंगल, 2 सितंबर – 16 अक्टूबर: वृश्चिक में, छठा भाव। छठे भाव में मंगल परंपरा के अनुसार सेहत के लिए मुख्य स्थिति है: ज़्यादा काम, सूजन और तीव्र बीमारी का जोखिम। दिनचर्या, नींद और संतुलित व्यायाम ज़रूरी हैं।
ग्यारहवें भाव में शनि: परंपरा के अनुसार रक्त वाहिकाओं और पिंडलियों का ध्यान रखें; नियमित टहलना मदद करता है।
मंगल इस समय वक्री है। परंपरा के अनुसार काम अटकते हैं और पुराने टकराव लौट आते हैं — ऊर्जा उन कामों में लगाना बेहतर है, जो पहले से शुरू हो चुके हैं।
ये सेहत के बारे में ज्योतिषीय सुझाव हैं, चिकित्सा सलाह नहीं: तबीयत ठीक न लगे तो डॉक्टर से मिलें।
कुल अंकों के अनुसार सबसे अच्छे महीने: जून, सितंबर, अक्टूबर।
यूरेनस, नेपच्यून और प्लूटो
आपकी राशि में यूरेनस — 84 साल में एक बार: परंपरा के अनुसार मुक्ति और अचानक निजी बदलावों का समय — रूप, जीवनशैली और मेल-जोल का दायरा अप्रत्याशित रूप से बदलते हैं।
ग्यारहवें भाव में नेपच्यून: आदर्शवादी सपने और मन से जुड़े दोस्त। परंपरा के अनुसार हर सहयोगी वैसा नहीं होता जैसा दिखता है।
नौवें भाव में प्लूटो: विश्वदृष्टि में बदलाव, प्रभावशाली गुरु। परंपरा के अनुसार कोई पढ़ाई या यात्रा जीवन बदल सकती है।
महीना-दर-महीना
जनवरी संतुलित महीना
सूर्य — आपका आठवाँ भाव: साझा धन और बदलाव। 7 जनवरी को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका सातवाँ भाव। 8 जनवरी को अमावस्या — आठवाँ भाव (साझा धन और बदलाव)। 10 जनवरी को मंगल वक्री होता है। 13 जनवरी को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका नौवाँ भाव। 20 जनवरी को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका नौवाँ भाव। 22 जनवरी को पूर्णिमा — तीसरा भाव (संवाद और यात्राएँ)।
महीने के अच्छे दिन: 1, 4, 14।
फ़रवरी तनावपूर्ण महीना
सूर्य — आपका नौवाँ भाव: लंबी यात्राएँ और पढ़ाई। 1 फ़रवरी को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका दसवाँ भाव। 3 फ़रवरी को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका आठवाँ भाव। 6 फ़रवरी को वलयाकार सूर्य ग्रहण — नौवाँ भाव (लंबी यात्राएँ और पढ़ाई)। 8 फ़रवरी को यूरेनस मार्गी होता है। 9 फ़रवरी को बुध वक्री होता है। 18 फ़रवरी को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका नौवाँ भाव। 19 फ़रवरी को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका दसवाँ भाव। 21 फ़रवरी को उपच्छाया चंद्र ग्रहण — चौथा भाव (घर और परिवार)। 21 फ़रवरी को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका तीसरा भाव।
महीने के अच्छे दिन: 1, 8, 10।
मार्च तनावपूर्ण महीना
सूर्य — आपका दसवाँ भाव: करियर और प्रतिष्ठा। 1 मार्च को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका नौवाँ भाव। 3 मार्च को बुध मार्गी होता है। 8 मार्च को अमावस्या — दसवाँ भाव (करियर और प्रतिष्ठा)। 18 मार्च को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका दसवाँ भाव। 21 मार्च को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका ग्यारहवाँ भाव। 22 मार्च को पूर्णिमा — पाँचवाँ भाव (प्रेम, संतान, रचनात्मकता)। 26 मार्च को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका दसवाँ भाव।
महीने के अच्छे दिन: 23, 27, 29।
अप्रैल अच्छा महीना
सूर्य — आपका ग्यारहवाँ भाव: मित्र और योजनाएँ। 1 अप्रैल को मंगल मार्गी होता है। 7 अप्रैल को अमावस्या — ग्यारहवाँ भाव (मित्र और योजनाएँ)। 9 अप्रैल को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका ग्यारहवाँ भाव। 13 अप्रैल को बृहस्पति मार्गी होता है। 20 अप्रैल को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका ग्यारहवाँ भाव। 20 अप्रैल को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका बारहवाँ भाव। 21 अप्रैल को पूर्णिमा — छठा भाव (काम और स्वास्थ्य)। 25 अप्रैल को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका बारहवाँ भाव।
महीने के अच्छे दिन: 3, 11, 23।
मई संतुलित महीना
सूर्य — आपका बारहवाँ भाव: विश्राम और एकांत। 6 मई को अमावस्या — बारहवाँ भाव (विश्राम और एकांत)। 8 मई को प्लूटो वक्री होता है। 9 मई को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका पहला भाव। 14 मई को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका चौथा भाव। 15 मई को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका बारहवाँ भाव। 20 मई को पूर्णिमा — छठा भाव (काम और स्वास्थ्य)। 21 मई को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका पहला भाव। 28 मई को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका दूसरा भाव।
महीने के अच्छे दिन: 4, 12, 22।
जून संतुलित महीना
सूर्य — आपका पहला भाव: व्यक्तित्व और सेहत। 5 जून को अमावस्या — पहला भाव (व्यक्तित्व और सेहत)। 8 जून को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका पहला भाव। 10 जून को बुध वक्री होता है। 19 जून को पूर्णिमा — सातवाँ भाव (साझेदार और अनुबंध)। 21 जून को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका दूसरा भाव। 26 जून को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका पहला भाव।
महीने के अच्छे दिन: 13, 14, 17।
जुलाई संतुलित महीना
सूर्य — आपका दूसरा भाव: धन और संपत्ति। 3 जुलाई को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका दूसरा भाव। 4 जुलाई को अमावस्या — दूसरा भाव (धन और संपत्ति)। 5 जुलाई को बुध मार्गी होता है। 10 जुलाई को नेपच्यून वक्री होता है। 12 जुलाई को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका दूसरा भाव। 15 जुलाई को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका पाँचवाँ भाव। 18 जुलाई को उपच्छाया चंद्र ग्रहण — आठवाँ भाव (साझा धन और बदलाव)। 23 जुलाई को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका तीसरा भाव। 26 जुलाई को बृहस्पति आगे बढ़ता है: अब आपका चौथा भाव। 27 जुलाई को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका तीसरा भाव।
महीने के अच्छे दिन: 12, 14, 30।
अगस्त तनावपूर्ण महीना
सूर्य — आपका तीसरा भाव: संवाद और यात्राएँ। 2 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण — तीसरा भाव (संवाद और यात्राएँ)। 2 अगस्त को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका तीसरा भाव। 9 अगस्त को शनि वक्री होता है। 17 अगस्त को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका चौथा भाव। 17 अगस्त को उपच्छाया चंद्र ग्रहण — नौवाँ भाव (लंबी यात्राएँ और पढ़ाई)। 21 अगस्त को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका चौथा भाव। 23 अगस्त को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका चौथा भाव। 31 अगस्त को अमावस्या — चौथा भाव (घर और परिवार)।
महीने के अच्छे दिन: 4, 8, 19।
सितंबर संतुलित महीना
सूर्य — आपका चौथा भाव: घर और परिवार। 2 सितंबर को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका छठा भाव। 3 सितंबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका पाँचवाँ भाव। 14 सितंबर को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका पाँचवाँ भाव। 15 सितंबर को यूरेनस वक्री होता है। 16 सितंबर को पूर्णिमा — दसवाँ भाव (करियर और प्रतिष्ठा)। 23 सितंबर को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका पाँचवाँ भाव। 27 सितंबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका छठा भाव। 30 सितंबर को अमावस्या — पाँचवाँ भाव (प्रेम, संतान, रचनात्मकता)।
महीने के अच्छे दिन: 17, 21, 22।
अक्टूबर अच्छा महीना
सूर्य — आपका पाँचवाँ भाव: प्रेम, संतान, रचनात्मकता। 7 अक्टूबर को बुध वक्री होता है। 8 अक्टूबर को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका छठा भाव। 15 अक्टूबर को पूर्णिमा — ग्यारहवाँ भाव (मित्र और योजनाएँ)। 16 अक्टूबर को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका सातवाँ भाव। 16 अक्टूबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका पाँचवाँ भाव। 18 अक्टूबर को प्लूटो मार्गी होता है। 23 अक्टूबर को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका छठा भाव। 28 अक्टूबर को बुध मार्गी होता है। 29 अक्टूबर को अमावस्या — छठा भाव (काम और स्वास्थ्य)।
महीने के अच्छे दिन: 3, 11, 22।
नवंबर अच्छा महीना
सूर्य — आपका छठा भाव: काम और स्वास्थ्य। 1 नवंबर को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका सातवाँ भाव। 10 नवंबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका छठा भाव। 14 नवंबर को पूर्णिमा — बारहवाँ भाव (विश्राम और एकांत)। 22 नवंबर को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका सातवाँ भाव। 25 नवंबर को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका आठवाँ भाव। 26 नवंबर को मंगल आगे बढ़ता है: अब आपका आठवाँ भाव। 28 नवंबर को अमावस्या — सातवाँ भाव (साझेदार और अनुबंध)। 29 नवंबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका सातवाँ भाव।
महीने के अच्छे दिन: 5, 15, 19।
दिसंबर संतुलित महीना
सूर्य — आपका सातवाँ भाव: साझेदार और अनुबंध। 13 दिसंबर को पूर्णिमा — पहला भाव (व्यक्तित्व और सेहत)। 15 दिसंबर को नेपच्यून मार्गी होता है। 18 दिसंबर को बुध आगे बढ़ता है: अब आपका आठवाँ भाव। 20 दिसंबर को शुक्र आगे बढ़ता है: अब आपका नौवाँ भाव। 22 दिसंबर को सूर्य आगे बढ़ता है: अब आपका आठवाँ भाव। 24 दिसंबर को शनि मार्गी होता है। 28 दिसंबर को अमावस्या — आठवाँ भाव (साझा धन और बदलाव)।
महीने के अच्छे दिन: 2, 13, 17।
यह राशिफल कैसे बनाया गया है
2027 का राशिफल धीमे ग्रहों पर बना है: मिथुन के लिए बृहस्पति और शनि कहाँ हैं, यूरेनस, नेपच्यून और प्लूटो किन भावों से गुज़रते हैं, ग्रहण किन भावों में पड़ते हैं और ग्रह कब वक्री होते हैं। यही वर्ष के मुख्य विषय हैं — इन्हें न दिन बदलते हैं, न हफ़्ते।
महीनेवार विश्लेषण और प्रेम, काम, धन व ऊर्जा के लिए सबसे अच्छे महीने — महीने के सभी दिनों के अंकों का योग: चंद्रमा का भाव, शुक्र, मंगल, बृहस्पति और शनि की स्थितियाँ, वक्री अवधियाँ, दृष्टियाँ, अमावस्या-पूर्णिमा और ग्रहण। सभी तारीख़ें — JPL DE421 एफ़ेमेरिस के अनुसार, भाव — सौर (सोलर हाउस): मिथुन — पहला भाव।
मिथुन का स्वामी
राशि का स्वामी — बुध। परंपरा के अनुसार मिथुन के लिए उसकी स्थिति और दृष्टियाँ दूसरी राशियों से ज़्यादा मायने रखती हैं: स्वामी की शुभ दृष्टियाँ पूरी अवधि को मज़बूत करती हैं, तनावपूर्ण — उसे कठिन बनाती हैं।
मिथुन राशिफल — दूसरी अवधियों के लिए
यह पाठ सभी मिथुन राशि वालों के लिए एक जैसा है — राशि का राशिफल ऐसे ही बनता है, और उसकी कोई सिद्ध भविष्यसूचक शक्ति नहीं है। व्यक्तिगत तस्वीर — जन्म कुंडली पर गोचर में और वर्षफल (सोलर रिटर्न) में, राशि का स्वभाव — मिथुन पेज पर।