बायोरिदम के अनुसार
बायोरिदम अनुकूलता यह गिनती है कि दो लोगों के तीन चक्रों — शारीरिक (23 दिन), भावनात्मक (28 दिन) और बौद्धिक (33 दिन) — के चरण कितने मेल खाते हैं। यह सूचक सिर्फ़ जन्म तिथियों के अंतर पर निर्भर करता है और इसलिए समय के साथ नहीं बदलता।
गणना कैसे करें
बायोरिदम का सिद्धांत कहता है कि जन्म के क्षण से इंसान में स्थिर अवधियों वाली तीन साइन तरंगें चलती हैं। जोड़ी के लिए हर एक का कलांतर गिना जाता है।
अगर जन्म तिथियों का अंतर अवधि का गुणज है, तो चरण पूरी तरह मेल खाते हैं — 100 %। अगर अंतर आधी अवधि के बराबर है, तो चरण विपरीत होते हैं — 0 %।
हर चक्र का प्रतिशत उन दिनों का अनुपात है जब दोनों में यह चक्र एक साथ उच्च चरण (शून्य से ऊपर) में या एक साथ निम्न चरण (शून्य से नीचे) में होता है।
चूँकि दो जन्म तिथियों का अंतर स्थिर है, जोड़ी की “बायोरिदम अनुकूलता” जीवन के किसी भी दिन एक जैसी रहती है। जो साइटें इसे दिन-ब-दिन बदलता हुआ दिखाती हैं, वे कुछ और गिन रही हैं।
गणना का उदाहरण
14 फ़रवरी 1988 और 8 जुलाई 1990 के बीच 875 दिन का अंतर है।
875 ÷ 23 = 38 चक्र और 1 दिन — शारीरिक लय लगभग मेल खाती हैं, क़रीब 91 %।
875 ÷ 28 = 31 चक्र और 7 दिन — भावनात्मक लय चौथाई अवधि खिसकी हुई हैं, 50 %।
875 ÷ 33 = 26 चक्र और 17 दिन, यानी अगले मेल तक 16 दिन — बौद्धिक लय लगभग विपरीत चरण में हैं, क़रीब 3 %।
औसत सूचक — क़रीब 48 %। ध्यान दें कि तीनों चक्र कितने अलग मान देते हैं: “कुल बायोरिदम अनुकूलता” तीन कमज़ोर रूप से जुड़ी संख्याओं का औसत है।
परिणाम का अर्थ
सिद्धांत के अनुसार शारीरिक लय के मेल का मतलब है सक्रियता और आराम की साझा दिनचर्या, भावनात्मक लय का — मूड का मेल, बौद्धिक लय का — साफ़ दिमाग़ वाले मिलते-जुलते दौर।
व्यवहार में कुछ और जानना ज़्यादा ज़रूरी है: बायोरिदम सिद्धांत की 1970 के दशक से कई बार जाँच हुई, और इन चक्रों तथा वास्तविक कार्यक्षमता, दुर्घटनाओं या मूड के बीच कोई संबंध नहीं मिला। दर्जनों अध्ययनों की समीक्षाएँ एक ही नतीजे पर पहुँचीं — कोई प्रभाव नहीं है।
इसलिए हम गणना को गणित के रूप में दिखाते हैं, सलाह के रूप में नहीं।
अर्थों की तालिका
| सूचक | अवधि | सिद्धांत क्या मानता है |
|---|---|---|
| शारीरिक | 23 दिन | ताक़त, सहनशक्ति, दिनचर्या |
| भावनात्मक | 28 दिन | मूड, संवेदनशीलता |
| बौद्धिक | 33 दिन | सोच की स्पष्टता, स्मृति |
अपने बायोरिदम का ग्राफ़ अलग पेज पर देखा जा सकता है — वहीं सिद्धांत के इतिहास और इसके पुष्ट न होने के कारणों का विश्लेषण भी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नतीजा दिन-ब-दिन क्यों नहीं बदलता?
क्योंकि उसे बदलना ही नहीं चाहिए: दो लोगों के बीच कलांतर गिना जाता है, और वह स्थिर रहता है। हर व्यक्ति के अपने बायोरिदम बदलते हैं, लेकिन उनकी आपसी स्थिति नहीं।
23, 28 और 33 की अवधियाँ कहाँ से आईं?
पहली दो अवधियाँ विल्हेम फ़्लीस ने 19वीं सदी के अंत में सुझाईं, तीसरी 1920 के दशक में जोड़ी गई। इन संख्याओं का कोई शारीरिक आधार नहीं है।
क्या इस पर भरोसा करना चाहिए?
नहीं। यह इस खंड की एकमात्र पद्धति है, जिसके बारे में साफ़ तौर पर पता है कि इसकी जाँच हुई और यह पुष्ट नहीं हुई।
तो फिर कैलकुलेटर क्यों?
क्योंकि यहाँ का गणित ईमानदार और जाँचा जा सकने वाला है, और लोग इसे खोजते हैं। हम गणना करते हैं और साथ ही बता देते हैं कि इस अंक का असली मूल्य क्या है।