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बीसवाँ आर्काना — जजमेंट। विषय है जीवन-कर्म की पुकार और हिसाब: वह पुकार जिसका जवाब देना होता है।
संतुलित पक्ष
बीते जीवन पर पुनर्विचार करने, सबक़ लेने और दिशा बदलने की क्षमता। संतुलित अवस्था में यह अपने काम का स्पष्ट एहसास और उसके इर्द-गिर्द लोगों को जोड़ने का हुनर देता है।
छाया पक्ष
आत्म-भर्त्सना और ख़ुद पर व दूसरों पर लगातार फ़ैसले सुनाना। छाया अवस्था का जजमेंट अभी कुछ बदलने के बजाय अतीत को उलटता-पलटता रहता है।