20 — जागृति और पुकार: वह क्षण जब व्यक्ति अपने जीवन-कार्य की आवाज़ सुनता है।
इसका अर्थ है नई समझ की ओर मोड़, अक्सर किसी झटके के बाद। चेतावनी कुछ और है: कर्म के बिना पुकार सपना ही रह जाती है।